धान की बालियां निकलते ही करें ये 5 काम, दाने होंगे वजनदार-चमकदार, पैदावार होगी बंपर

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धान की बालियां निकलते ही करें ये 5 काम, दाने होंगे वजनदार और चमकदार

Last Updated:August 26, 2026, 13:48 IST

Paddy Farming Tips: धान की फसल में बालियां निकलने के बाद अगर दाने ठीक से नहीं भर रहे हैं या कई दाने खाली रह जा रहे हैं, तो किसान को सावधान होने की जरूरत है. फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन के अनुसार इस समस्या के पीछे पोषक तत्वों की कमी, ज्यादा तापमान, खेत में नमी की कमी और कीट-रोग जैसे कई कारण हो सकते हैं. खासकर बाली निकलने और दाना बनने की अवस्था धान के लिए बेहद अहम होती है. इस दौरान फसल की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो दानों का वजन और पूरी पैदावार प्रभावित हो सकती है.

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन ने बताया कि धान की बालियों में दाना न भरने या खाली रहने का मुख्य कारण बालियां निकलते समय पोषक तत्वों की कमी होना है. इसके अलावा, इस समय अत्यधिक तापमान, नमी की कमी या फफूंद और कीटों का हमला भी दानों के विकास को रोक देता है. यदि फूल आते समय परागण की क्रिया ठीक से नहीं होती, तो बालियों के निचले या बीच के दाने थोथे रह जाते हैं जिससे सीधा नुकसान होता है.

अगेती धान में बालियां निकलने के बाद किसी भी रूप में नाइट्रोजन या यूरिया का इस्तेमाल न करें. इस अवस्था में यूरिया डालने से पौधा अपनी ऊर्जा केवल पत्तियों और तने की वृद्धि में लगाने लगता है. इससे दाना बनने की प्रक्रिया सुस्त हो जाती है. ज्यादा यूरिया के प्रयोग से फसल में कीटों और बीमारियों का हमला भी तेजी से बढ़ता है, जिससे दाना भरने की जगह फसल गिरने लगती है.

बालियां निकलने की शुरुआत में एनपीके 00:52:34 और बालियां पूरी निकलने के बाद एनपीके 00:00:50 यानी पोटाश का छिड़काव बेहद फायदेमंद होता है. 1 किलोग्राम पोटाश को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें. पोटाश पौधों में कार्बोहाइड्रेट के परिवहन को तेज करता है, जिससे बालियों के आखिरी दाने तक स्टार्च पहुंचता है. इससे बालियों के सभी दाने वजनदार, चमकदार और पूरी तरह भर जाते हैं.

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धान में दाना खाली रहने से बचाने के लिए बोरोन का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण है. बोरोन परागण (Pollination) की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और पराग नलिका के निर्माण में मदद करता है. गोभ अवस्था में एनपीके के साथ 100 ग्राम बोरोन (20%) प्रति एकड़ घोलकर छिड़कने से दाना खाली रहने की समस्या खत्म होती है. ध्यान रखें कि बोरोन का छिड़काव फूल खिलने से ठीक पहले कर लेना चाहिए.

बालियां निकलने से लेकर दाना सख्त होने तक खेत में पर्याप्त नमी का होना बहुत जरूरी है. इस समय खेत को सूखने न दें, क्योंकि पानी की कमी से दाना बनने की प्रक्रिया रुक जाती है. हालांकि, खेत में अत्यधिक पानी भरकर रखना भी सही नहीं है. हल्का पानी दें या केवल गीली मिट्टी बनाए रखें. खेत में पर्याप्त नमी रहने से पौधे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को आसानी से ग्रहण करते हैं.

जब धान की बालियों में दूध भर रहा होता है, तब गंधी बग (Chinch bug) दाने का रस चूस लेती है. रस चूसने के कारण दाना खोखला और बदरंग हो जाता है. इसकी रोकथाम के लिए खेत के आसपास सफाई रखें. प्रकोप दिखने पर मैलाथियान 5% धूल का छिड़काव सुबह के समय करें या अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग करें. कीट नियंत्रण से दानों की गुणवत्ता और वजन दोनों सुरक्षित रहते हैं.

बालियों के समय नेक ब्लास्ट या कंडुआ रोग का हमला हो सकता है. इससे बालियां सूख जाती हैं और दाना नहीं बनता. इस समस्या से बचने के लिए बालियां निकलते समय टेबूकोनाज़ोल या ट्राइसाइक्लाज़ोल जैसे उपयुक्त फफूंदनाशी (Fungicide) का छिड़काव करें. फफूंदनाशी के प्रयोग से पौधे स्वस्थ रहते हैं, पत्तियां हरी-भरी बनी रहती हैं और प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन दानों तक सही ढंग से पहुंचता है.

छिड़काव हमेशा साफ पानी में करें और सही मात्रा में ही रसायनों को मिलाएं. तेज धूप या दोपहर के समय छिड़काव करने से बचें, सुबह या शाम का समय सबसे उत्तम होता है. जब खेत में फूल खिले हों, उस समय छिड़काव करने से बचें ताकि परागण प्रभावित न हो. यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं, तो धान की हर एक बाली दानों से पूरी तरह भरेगी और शानदार पैदावार मिलेगी.

First Published :

August 26, 2026, 13:48 IST

Source

dainikupeditor@gmail.com

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