Last Updated:June 11, 2026, 21:52 IST
Hardik Pandya’s Injury Update: भारतीय क्रिकेट फैंस और टीम मैनेजमेंट के लिए एक बार फिर वही पुरानी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है. स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या एक बार फिर चोटिल हो गए हैं. बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से उन्हें हरी झंडी मिलने ही वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर उनकी फिटनेस ने दगा दे दिया.
हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में अपनी पुरानी चोटों से उबरकर पूरी तरह फिट होने की दहलीज पर खड़े थे.लेकिन खेल के मैदान पर लौटने की यह जल्दबाजी उन पर भारी पड़ गई. फिटनेस असेसमेंट के दौरान जब उनसे मैच जैसी परिस्थितियों में गेंदबाजी करने को कहा गया, तो उनके शरीर ने जवाब दे दिया. इसी असेसमेंट के दौरान वह एक नई चोट का शिकार हो गए, जिसने भारतीय खेमे की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है.
RevSportz की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ताजा चोट की मुख्य वजह फिटनेस टेस्ट के दौरान पंड्या से पूरे 10 ओवर गेंदबाजी कराना रहा. वनडे क्रिकेट के लिहाज से खुद को साबित करने के लिए हार्दिक ने जब अपने कोटे के पूरे 10 ओवर फेंके, तो उनके पैर की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा. इसके तुरंत बाद उन्हें दाहिने पैर में तेज दर्द महसूस हुआ. बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में जब उनका आनन-फानन में स्कैन कराया गया, तो डॉक्टरों ने ‘क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेन’ (जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव) की पुष्टि की.
इस नई चोट का पहला और तात्कालिक असर यह हुआ है कि हार्दिक पंड्या शनिवार से शुरू हो रही भारत-अफगानिस्तान तीन मैचों की घरेलू वनडे सीरीज से पूरी तरह बाहर हो गए हैं. इस सीरीज का पहला मुकाबला धर्मशाला के खूबसूरत मैदान पर खेला जाना था, जहां फैंस को हार्दिक के ऑलराउंड प्रदर्शन की उम्मीद थी. लेकिन अब टीम इंडिया को उनके बिना ही मैदान पर उतरना होगा, जिससे टीम का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
मेडिकल टीम और विशेषज्ञों के अनुसार, क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेन जैसी चोट को ठीक होने और खिलाड़ी को दोबारा मैच-फिट होने में कम से कम तीन सप्ताह का समय लगता है. इसका सीधा मतलब यह है कि हार्दिक अगले 20-22 दिनों तक क्रिकेट के बल्ले या गेंद को हाथ भी नहीं लगा पाएंगे. वह बेंगलुरु में ही रहकर बीसीसीआई की मेडिकल टीम की देखरेख में अपना रिहैब शुरू करेंगे ताकि इस चोट को और गंभीर होने से बचाया जा सके.
अफगानिस्तान सीरीज गंवाने के बाद अब हार्दिक पंड्या की नजरें आगामी विदेशी दौरों पर टिकी हैं. तीन हफ्तों के रिहैब के बाद, जुलाई में होने वाली भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज को उनकी वापसी के लिए सबसे पहला और मुफीद विंडो माना जा रहा है. हालांकि, इंग्लैंड की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होती हैं, ऐसे में वहां सीधे मैच खेलना हार्दिक के लिए आसान नहीं होगा.
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय क्रिकेट के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. क्या हार्दिक पांड्या का शरीर अब वनडे क्रिकेट में लगातार 10 ओवर गेंदबाजी करने का भार उठाने में सक्षम है? हर बार जब भी वह अपनी गेंदबाजी का वर्कलोड बढ़ाते हैं, उनका शरीर जवाब दे देता है. यह स्थिति बीसीसीआई और टीम के थिंक-टैंक के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि एक ऑलराउंडर के रूप में उनका आधा अधूरा इस्तेमाल टीम के संतुलन को बिगाड़ता है.
हार्दिक की इसी शारीरिक संवेदनशीलता को देखते हुए चयनकर्ता अब बेहद सतर्क हो गए हैं. यही वजह है कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किया गया है. मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि अभी हार्दिक के वर्कलोड को मैनेज करना उनकी प्राथमिकता है. सिलेक्टर्स उन्हें फिलहाल सिर्फ 50 ओवर (वनडे) के फॉर्मेट तक ही सीमित रखना चाहते हैं ताकि उनका करियर लंबा चल सके.
बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने साफ किया है कि हार्दिक पंड्या और तेज गेंदबाज जसप्रित बुमराह को लेकर टीम इंडिया का लॉन्ग-टर्म प्लान क्या है. बोर्ड का पूरा ध्यान अब दक्षिण अफ्रीका में होने वाले 2027 वनडे वर्ल्ड कप पर केंद्रित है. अगरकर के मुताबिक, हार्दिक को टी20 से आराम देने का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या वह धीरे-धीरे अपनी लय हासिल करके पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं, ताकि 2027 के महाकुंभ में वह भारत के लिए मुख्य हथियार साबित हों.
भारतीय क्रिकेट में हार्दिक पांड्या इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टीम के पास उनका कोई सटीक विकल्प मौजूद नहीं है. घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के जरिए शिवम दुबे और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे युवाओं को निशानी पर रखा गया है, लेकिन इन दोनों खिलाड़ियों के पास न तो हार्दिक जैसी 140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने की क्षमता है और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच जिताने का वो अनुभव. हार्दिक की गैरमौजूदगी में भारत को हमेशा दो अलग-अलग खिलाड़ियों (एक शुद्ध बल्लेबाज और एक शुद्ध गेंदबाज) को खिलाने पर मजबूर होना पड़ता है.
इतिहास गवाह है कि हार्दिक पंड्या की इंजरी हिस्ट्री बेहद डरावनी रही है. पीठ की सर्जरी से लेकर टखने और अब जांघ की चोट तक, उनका करियर लगातार ब्रेक लेता रहा है. बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इस हफ्ते जो कुछ भी हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हार्दिक से लगातार उनके कोटे के पूरे ओवर फेंकने की उम्मीद करना एक बहुत बड़ा जोखिम है.











