महारानी दुर्गावती ने क्यों चुनी वीरगति? जानिए इतिहास और लोकमान्यताएं

Last Updated:July 03, 2026, 08:17 IST

महारानी वीरांगना दुर्गावती भारतीय इतिहास की वीर योद्धाओं में गिनी जाती हैं. गोंड समाज उन्हें अपनी आराध्य देवी मानकर पूजता है और हर वर्ष 24 जून को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है. उनकी वीरता, त्याग और आत्मसम्मान की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है.

क्या आपने किसी ऐसी महिला का नाम सुना है जिसको उस समाज के लोग अपना देवी मान कर पूजा पाठ करते हैं. अगर नहीं तो आज हम बात कर रहे हैं महारानी वीरांगना दुर्गावती देवी की जो अपने समाज के लिए लड़ाई लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई थी. इसके बाद उनका समाज आज अपना देवी मानकर पूजा पाठ करता है आईए जानते हैं कौन है महारानी वीरांगना दुर्गावती देवी.

बांदा जिले की थी महारानी वीरांगना दुर्गावती

लोकल 18 से बात करते हुए पप्पू गोंड बताते हैं कि महारानी वीरांगना दुर्गावती वह उनके समाज गोंड समाज से आती है. जिनका जन्म 5 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुआ था. तथा इनका विवाह मध्य प्रदेश के जबलपुर में दलपत से हुआ था जो मुगल शासक में वहां के राजा हुआ करते थे. लगभग उनके पति का 12 से 14 साल तक साथ रहा इस दौरान उनका एक पुत्र हुआ और उनके पति का इस दौरान साथ छूट गया क्योंकि उस दौरान उनके पति की मौत हो गई. फिर महारानी वरंग राज दुर्गावती ने अपने साम्राज्य की गद्दी संभाली और महिला होते हुए भी शासन के रूप में यह लगभग 50 लड़ाइयां लड़ी.

24 जून 1964 को हो गई थीं वीरगति को प्राप्त

24 जून 1664 ईस्वी में आसिफ खान से आखिरी लड़ाई लड़ते हुए वह हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई लड़ते हुए उन्हें छोड़ा गई इस दौरान उन्होंने अपना हार स्वीकार न मानते हुए खुद के खंजर से मार अपने मौत को कबूल करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गई थी. क्योंकि वह अपना हार स्वीकार नहीं करना चाहती थी इसलिए वह आसिफ खान के हाथ नहीं लगी और खुद ही खंजर मार कर वीरगति को प्राप्त हो गई. जो इनकी समाज के लिए देवी के रूप में मानी जाती है और यह कहा जाता है कि गोंड समाज उनका ही वंशज है जिनका आज पूजा पाठ बहुत ही भव्य तरीके से किया जाता है जगह-जगह उनकी मंदिर की स्थापना की जा रही है.

24 जून को मनाया जाता है धूमधाम से बलिदान दिवस

आज के समय मध्य प्रदेश में महारानी वीरांगना दुर्गावती के नाम से जगह-जगह म्यूजियम बना हुआ है, तथा इन्हीं के नाम से रेलवे स्टेशन बना हुआ है. और सरकार द्वारा उनके द्वारा स्मृति चिन्हों का अनावरण भी किया जा रहा है. इस तरह उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के देवास में भी इनकी मंदिर का अनावरण किया गया है. जिनका 24 जून को बलिदान दिवस के रूप में स्मृति मनाई जाती है जो पूरी धूमधाम से मनाई जाती है. इस वर्ष भी मऊ में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होकर उनके बलिदान दिवस को मनाया था यह वर्षों से परंपरा चली आ रही है. क्योंकि महारानी वीरांगना दुर्गावती के यह वंशज है और अपना देवी मानकर उन्हें लोग पूजा पाठ करते हैं.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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