Last Updated:May 07, 2026, 16:26 IST
Sultanpur News: इस समय गर्मी का मौसम चल रहा है और गर्मी के मौसम में लोग खुद को ठंडा रखने के लिए एसी या कूलर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन शायद आपको नहीं पता होगा कि एसी और कूलर से भी अच्छा नेचुरली हवा ग्रामीण इलाकों में घास-फूंस से बनी झोपड़ियां और कुटिया में होती है. आइए इसके बारे में सबकुछ जानते हैं.
सुल्तानपुर: इस समय गर्मी का मौसम चल रहा है. ऐसे में लोग अपने घर पर कूलर, एसी, पंखा आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन शायद आपको नहीं पता होगा कि एसी और कूलर से भी अच्छा नेचुरली हवा ग्रामीण इलाकों में घास-फूंस से बनी झोपड़ियां और कुटिया में होती है. ऐसे ही एक कुटिया सुल्तानपुर शहर में गोमती नदी के किनारे बनाई गई है, जिसे सरपत से बनाया गया है. यह कुटिया प्राकृतिक हवा का और ठंडक का बेहतरीन अनुभव कराती है. ऐसे में आज हम जानेंगे कि सरपत की कुटिया कैसे बनाई जाती है और आप गर्मी में अगर प्राकृतिक ठंडक का आनंद लेना चाहते हैं तो यह कुटिया आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है और इसको बनाने में कितनी लागत आती है.
सरपत की कुटिया में रहने वाले और इसको बनाने वाले दयानंद लोकल 18 से बताते हैं कि सबसे पहले जमीन पर बांस और लकड़ी के खंभे गाड़कर ढांचा तैयार किया जाता है. इसके बाद सरपत की लंबी घास को सुखाकर बंडल बनाया जाता है. इन बंडलों को रस्सी या बांस की पतली पट्टियों से ढांचे पर बांधा जाता है. कुटिया की छत को ढलानदार बनाया जाता है, ताकि बारिश का पानी आसानी से नीचे गिर जाए. दीवारों में भी सरपत की मोटी परत लगाई जाती है.कई जगह नीचे मिट्टी और गोबर का लेप किया जाता है, जिससे मजबूती बढ़ती है और अंदर ठंडक बनी रहती है.
गर्मी में इस तरह मिलती है राहत
सरपत की कुटिया नेचुरली एयर कूलिंग का काम करती है, क्योंकि इसके बीच में छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिनसे हवा अंदर-बाहर होती रहती है. इससे कुटिया के भीतर लगातार वेंटिलेशन होता है. इसके अलावा सरपत धूप की गर्मी को सीधे अंदर नहीं आने देता. सरपट की मोटी परत तेज धूप को रोकती है, जिससे अंदर का तापमान बाहर की तुलना अपेक्षा में काफी कम रहता है. अगर कुटिया पर हल्का पानी छिड़क दिया जाए तो अंदर और ज्यादा ठंडक महसूस होती है.
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
सरपत पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसलिए इससे बनी कुटिया पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती है. इसे बनाने में सीमेंट, लोहे और ज्यादा बिजली की जरूरत नहीं पड़ती है. यही वजह है कि आज भी खेतों, बागों और गांवों में लोग सरपत की कुटिया बनाते हैं और गर्मी के मौसम में आराम करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से काफी ठंडक प्रदान करता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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