ये अंग्रेजी शराब ‘संगम’ क्‍या है, किसने इसे बनाया, जो प्रयागराज में साधु-संत नाराज हैं

Last Updated:May 08, 2026, 14:42 IST

Prayagraj News : अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्‍वामी महेशाश्रम महाराज ने जहां इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है, वहीं स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य के नेतृत्व में संतों ने प्रयागराज में विरोध प्रदर्शन कर प्रतिबंध की मांग की है. आखिर इस शराब की वजह से क्‍यों प्रयागराज में विरोध बढ़ता जा रहा है. पूरा माजरा क्‍या है, आइये समझते हैं..

प्रयागराज में संगम शराब ब्रांड के पोस्टर को लेकर विरोध जताया गया.

प्रयागराज : प्रयागराज में अंग्रेजी शराब के एक ब्रांड का नाम संगम होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. साधु-संतों और धार्मिक संगठनों ने इसे सनातन आस्था का अपमान बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए है. चूंकि त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म में बेहद पवित्र स्थल माना जाता है. यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है. करोड़ों श्रद्धालु यहां स्नान और मोक्ष की कामना लेकर आते हैं. इसी वजह से संत समाज का कहना है कि संगम शब्द केवल एक सामान्य नाम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रतीक है. ऐसे में शराब ब्रांड के लिए इस नाम का इस्तेमाल धार्मिक अपमान माना जा रहा है. आखिर पूरा मामला क्‍या है आइये जानते हैं..

दरअसल, प्रयागराज में हाल ही में संगम नाम से अंग्रेजी शराब के प्रचार और पोस्टर सामने आने के बाद संत समाज में नाराजगी बढ़ गई. अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्‍वामी महेशश्स्वामी महेशश्रम महाराज ने इसे सुनियोजित साजिश बताया. वहीं स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य के नेतृत्व में संतों ने बालसन चौराहे पर महर्षि भारद्वाज प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया.

संतों ने संगम शराब ब्रांड के पोस्टर लेकर विरोध जताया और सरकार से इस नाम पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की. उनका कहना है कि संगम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, जहां लोग मोक्ष की कामना लेकर स्नान करने आते हैं. ऐसे पवित्र शब्द का उपयोग शराब जैसे उत्पाद के लिए करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है.

आखिर संगम नाम इतना संवेदनशील क्यों?
त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. यह गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम स्थल है. महाकुंभ और माघ मेले जैसे धार्मिक आयोजनों के कारण इसकी पहचान केवल भौगोलिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भी है. यही वजह है कि संत समाज इस नाम को धार्मिक विरासत से जोड़कर देख रहा है. उनका तर्क है कि जिस शब्द से करोड़ों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हो, उसे शराब की मार्केटिंग में इस्तेमाल करना अनुचित है.

संगम शराब ब्रांड पर विवाद क्यों? 
ऐसे में प्रयागराज में संगम नाम से बिक रही अंग्रेजी शराब को लेकर संत समाज के विरोध के पीछे अब केवल धार्मिक भावना ही नहीं, बल्कि एक बड़ा ब्रांड और कारोबारी मॉडल भी चर्चा में आ गया है. जिस संगम नाम को साधु-संत सनातन आस्था का प्रतीक बता रहे हैं, वह दरअसल भारत की बड़ी शराब कंपनियों में शामिल रेडिको खेतान की प्रीमियम व्हिस्की ब्रांड Sangam World Malt Whisky है.

आखिर क्या है ‘Sangam World Malt Whisky’?
Sangam World Malt Whisky एक प्रीमियम वर्ल्ड माल्ट व्हिस्की ब्रांड है, जिसे रामपुर डिस्टिलरी के जरिए लॉन्च किया गया. यह डिस्टिलरी रेडिको खेतान के स्वामित्व में है. कंपनी ने इस ब्रांड को पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2023 में उतारा और बाद में भारत में लॉन्च किया. कंपनी के मुताबिक Sangam शब्द हिंदी के संगम यानी confluence से लिया गया है, जिसका मतलब अलग-अलग धाराओं का मिलन होता है. ब्रांड की मार्केटिंग लाइन East meets West यानी पूर्व और पश्चिम के मेल पर आधारित है. इसमें यूरोप और दूसरे देशों के माल्ट्स के साथ भारतीय माल्ट का मिश्रण किया गया है. इस व्हिस्की को Radico Khaitan ने तैयार किया है, जो भारत की बड़ी IMFL (Indian Made Foreign Liquor) कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी पहले से Magic Moments Vodka, Rampur Indian Single Malt, Jaisalmer Gin, Morpheus Brandyजैसे बड़े प्रीमियम ब्रांड चला रही है.

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