ममता के साथ जाना था दिल्ली, फिर एक दिन पहले क्यों पहुंचे अभिषेक बनर्जी? ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ ने बढ़ाई दीदी की टेंशन

TMC in crisis: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद अब उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बड़ी टूट की कगार पर है। 50 से ज्यादा विधायकों ने तो बगावत कर दी। अब माना जा रहा है कि TMC के कई सांसद भी उसी राह पर है। ऐसे में पार्टी को बचाने की जद्दोजहद में जुटीं ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक को दिल्ली भेज दिया है।

वैसे तो सोमवार (8 जून) को होने वाली INDI गठबंधन की बैठक के लिए ममता बनर्जी खुद भी दिल्ली आ रही हैं। उन्हें और अभिषेक दोनों को साथ में रविवार को राजधानी पहुंचना था, लेकिन ममता ने भतीजे को तय कार्यक्रम से एक दिन पहले ही यहां भेज दिया है।

शनिवार को दिल्ली पहुंचे अभिषेक बनर्जी

पार्टी में मची उथल-पुथल के बीच अभिषेक बनर्जी शनिवार (6 जून) को ही दिल्ली पहुंच गए हैं। TMC के राष्ट्रीय महासचिव का एक दिन पहले दिल्ली आने की वजह अब तक सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। इसे पार्टी की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने और सांसदों में फैले असंतोष को काबू में करने की ममता बनर्जी की रणनीतिक कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने भतीजे को जल्दी दिल्ली भेजने का फैसला लिया, लेकिन रविवार को अभिषेक का क्या कार्यकम रहेगा, ये कोई नेता नहीं बता रहा है।

CID के सामने अभिषेक को होना हैं पेश

अभिषेक का दिल्ली दौरे को लेकर इसलिए भी खूब चर्चाएं हो रही है, क्योंकि सोमवार को उन्हें विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी (CID) के सामने पेश होना है। अभिषेक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर अतिरिक्त वक्त की मांग की है, जिसे जांच एजेंसी ने पूरी तरह खारिज कर दिया था।

विधायकों के बाद अब सांसद भी करेंगे बगावत? 

ममता बनर्जी की टेंशन इस वक्त ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ के चलते बढ़ी हुई है। तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने कुछ दिन पहले पार्टी के आधिकारिक विधायक दल से अलग होकर निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली। 1998 में पार्टी स्थापना के बाद यह ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है। यह बगावत मुख्य रूप से अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभुत्व और परिवारवाद के खिलाफ थी, जिसे असंतुष्ट नेताओं ने अनौपचारिक रूप से ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ नाम दिया था।

लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के टूटने की आशंका गहरा गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के करीब 20 सांसद बगावत की तैयारी में हैं। लोकसभा में TMC के पास फिलहाल 28 सांसद हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए उन्हें संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सांसदों (19 सांसदों) का समर्थन हासिल करना होगा। राज्यसभा में TMC के 13 सांसद हैं। ऐसे में दोनों सदनों में समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

अब देखना होगा कि अभिषेक बनर्जी संसद में अपनी पार्टी को बिखरने से बचा पाते हैं या तृणमूल कांग्रेस टूटकर दो टुकड़ों में बंट जाएगी।

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