Raghav Chadha resignation: आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ा भूचाल आ गया है। राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद पार्टी में अंदरूनी तनाव बढ़ गया था। जिसके बाद अब खुद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 6 सांसदों समेत ना सिर्फ आम आदमी पार्टी से इस्तीफे देने की बात कही, बल्कि दूसरे दल यानी बीजेपी में जाने की घोषणा भी कर दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ता है तो दल-बदल कानून लागू हो सकता है। लेकिन अगर दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो अयोग्यता से बचाव हो सकता है। यानी अभी AAP के राज्यसभा में कितने सांसद हैं, इसकी सही संख्या के आधार पर ही आगे की स्थिति साफ हो सकेगी। हालांकि संजय सिंह जैसे नेता अभी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े दिख रहे हैं।
राघव चड्ढा ने हाल ही में पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनकी चुप्पी को हार न समझा जाए। उन्होंने संसद में आम आदमी के मुद्दों को उठाने की बात दोहराई थी। जिसके बाद अब उन्होंने खुले तौर पर आम आदमी पार्टी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि, आम आदमी पार्टी सिद्धांतों से भटक चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या यह संकट पंजाब की AAP सरकार को भी प्रभावित करेगा? 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की एकता कितनी बनी रहती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
AAP नेतृत्व ने अब तक इस मामले को आंतरिक संगठनात्मक बदलाव बताया था। दिल्ली की सियासत और पंजाब की सरकार दोनों पर इस इस्तीफे का बड़ा असर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे संकट विपक्षी दलों के लिए चुनौती पैदा करते हैं। आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं को अब पार्टी की एकता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाने पड़ सकते हैं।










