Last Updated:March 11, 2026, 11:48 IST
बिठूर को प्राचीन समय से ही एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. यहां ब्रह्मा खूंटी, ध्रुव टीला और वाल्मीकि आश्रम जैसे कई स्थान हैं, जिनका उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है. मान्यता है कि यहीं पर माता सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था और ऋषि वाल्मीकि का आश्रम भी यहीं स्थित था.
कानपुर: गंगा किनारे बसा ऐतिहासिक और धार्मिक नगर बिठूर अब जल्द ही नए रूप में नजर आ सकता है. प्रदेश सरकार यहां काशी की तर्ज पर एक भव्य कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रही है. इस योजना का उद्देश्य बिठूर को देश-दुनिया के धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है. माना जाता है कि रामायण काल से जुड़ी कई पौराणिक घटनाओं का संबंध बिठूर से रहा है. यही वजह है कि यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन और घूमने के लिए पहुंचते हैं. अब अगर कॉरिडोर बनता है, तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पूरे क्षेत्र का स्वरूप भी बदल जाएगा.
बिठूर की पौराणिक पहचान
बिठूर को प्राचीन समय से ही एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. यहां ब्रह्मा खूंटी, ध्रुव टीला और वाल्मीकि आश्रम जैसे कई स्थान हैं, जिनका उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है. मान्यता है कि यहीं पर माता सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था और ऋषि वाल्मीकि का आश्रम भी यहीं स्थित था. गंगा किनारे बने घाटों पर हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं. ब्रह्मा खूंटी के सामने बहती गंगा का शांत और मनमोहक दृश्य यहां आने वालों को खास अनुभव देता है.
कॉरिडोर बनने से बदल जाएगी तस्वीर
बिठूर से भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने इस क्षेत्र को विकसित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया था. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को मौखिक मंजूरी दे दी है. योजना के तहत बिठूर में आने-जाने के लिए बेहतर सड़क और एप्रोच मार्ग बनाए जाएंगे. साथ ही गंगा किनारे बने सभी घाटों को सुंदर और व्यवस्थित किया जाएगा. इसका मकसद यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और वे आसानी से सभी धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें.
25 से ज्यादा घाट, लेकिन पहुंचना मुश्किल
कानपुर इतिहास समिति के इतिहासकार अनूप शुक्ल ने बताया बिठूर में गंगा किनारे करीब 25 से अधिक घाट बने हुए हैं. इनमें पटकापुर से लेकर वाल्मीकि आश्रम तक कई घाट शामिल हैं. लेकिन अभी इन सभी घाटों तक एक साथ पहुंचना आसान नहीं है, क्योंकि यहां कोई व्यवस्थित परिपथ या कॉरिडोर नहीं है. अगर कॉरिडोर बनता है तो सभी घाटों को एक बेहतर मार्ग से जोड़ा जा सकेगा. इससे श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन कर पाएंगे.
बिठूर का इतिहास काफी पुराना है और यह क्षेत्र नवपाषाण काल से समृद्ध रहा है. रामायण काल में यहां वाल्मीकि आश्रम स्थापित हुआ और तभी से यह स्थान धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. पिछले कुछ वर्षों में बिठूर को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए कई प्रयास भी किए गए, जिनमें बिठूर महोत्सव जैसे आयोजन शामिल हैं. इस महोत्सव में कई बड़े कलाकार, अधिकारी और नेता भी हिस्सा लेते रहे हैं.
पर्यटन के नक्शे पर चमकेगा बिठूर
वहीं पर्यटन की दृष्टि से बात की जाए तो अगर बिठूर को काशी की तर्ज पर विकसित किया जाता है, तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ सकती है. इससे न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. उम्मीद की जा रही है कि शासन से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस कॉरिडोर परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा और आने वाले समय में बिठूर एक बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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Kanpur,Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
March 11, 2026, 11:43 IST










