ऋषि कपूर की 6 फ्लॉप फिल्में, जो वक्त के साथ बन गईं मास्टरपीस

Last Updated:May 22, 2026, 15:52 IST

ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जो रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुईं. लेकिन वक्त के साथ वही फिल्में दर्शकों के दिलों में बस गईं और आज उन्हें बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है. ‘मेरा नाम जोकर’ से लेकर ‘कर्ज’, ‘दूसरा आदमी’, ‘जमाने को दिखाना है’, ‘राही बदल गए’ और ‘आ अब लौट चलें’ जैसी फिल्मों ने साबित किया कि असली सफलता सिर्फ कमाई से नहीं, बल्कि लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहने से मिलती है. यही वजह है कि ऋषि कपूर आज भी सिनेमा प्रेमियों के पसंदीदा सितारों में शामिल हैं.

‘मेरा नाम जोकर’ ने तोड़ दिया था कपूर परिवार का सपना: राज कपूर की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘मेरा नाम जोकर’ साल 1970 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में ऋषि कपूर ने बतौर बाल कलाकार डेब्यू किया था और अपने अभिनय से सभी का दिल जीत लिया था. उन्हें इस रोल के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला. लेकिन इतनी बड़ी स्टारकास्ट और भारी बजट के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. कहा जाता है कि इस फिल्म की असफलता से कपूर परिवार आर्थिक संकट में आ गया था. हालांकि वक्त बीतने के साथ यही फिल्म आज विश्व सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है.

‘कर्ज’ को रिलीज के वक्त नहीं मिला प्यार: साल 1980 में आई ऋषि कपूर की म्यूजिकल थ्रिलर फिल्म ‘कर्ज’ आज भी लोगों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है. ‘ओम शांति ओम’ जैसे गानों ने इस फिल्म को अमर बना दिया. लेकिन रिलीज के समय दर्शकों ने इसे ज्यादा पसंद नहीं किया और फिल्म फ्लॉप हो गई. उस दौर में ‘कुर्बानी’ जैसी फिल्मों का क्रेज ज्यादा था. हालांकि बाद में टीवी और वीडियो युग में ‘कर्ज’ की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसे बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में गिना जाने लगा.

अपने समय से काफी आगे थी ‘दूसरा आदमी’: 1977 में रिलीज हुई ‘दूसरा आदमी’ एक बेहद बोल्ड और भावनात्मक कहानी पर आधारित फिल्म थी. इसमें उम्र में बड़ी महिला और छोटे लड़के के रिश्ते को दिखाया गया था. उस समय भारतीय समाज इतने खुले विचारों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था. यही वजह रही कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी. लेकिन आज के दौर में जब वेब सीरीज और फिल्मों में ऐसे विषय आम हो चुके हैं, तब लोग इस फिल्म को अपने समय से आगे की कहानी मानते हैं.

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‘जमाने को दिखाना है’ के गाने हुए सुपरहिट: 1981 में रिलीज हुई ‘जमाने को दिखाना है’ उस समय दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाई थी. लोगों को इसकी कहानी कमजोर लगी और फिल्म फ्लॉप हो गई. लेकिन ऋषि कपूर की शानदार स्क्रीन प्रेजेंस, डांस और कॉमिक टाइमिंग ने बाद में इस फिल्म को टीवी पर बेहद लोकप्रिय बना दिया. खासकर इसके गाने आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खूब पसंद किए जाते हैं. यही वजह है कि यह फिल्म समय के साथ कल्ट स्टेटस हासिल कर चुकी है.

‘राही बदल गए’ को OTT दौर में मिला नया प्यार: 1985 में आई ‘राही बदल गए’ में ऋषि कपूर ने डबल रोल निभाया था. फिल्म की कहानी एक शांत और भावनात्मक लव स्टोरी थी, लेकिन उस दौर में दर्शक ज्यादा एक्शन फिल्मों की तरफ आकर्षित हो रहे थे. इसी कारण यह फिल्म सिनेमाघरों में सफल नहीं हो पाई. हालांकि आज ओटीटी और यूट्यूब के दौर में इस फिल्म को फिर से देखा जा रहा है और लोग इसकी सादगी भरी कहानी की तारीफ कर रहे हैं.

‘आ अब लौट चलें’ को अब मिलता है सम्मान: साल 1999 में रिलीज हुई ‘आ अब लौट चलें’ ऋषि कपूर के निर्देशन में बनी पहली और आखिरी फिल्म थी. इसमें विदेशों में रह रहे भारतीयों की भावनाओं, परिवार और रिश्तों को दिखाया गया था. रिलीज के समय दर्शकों को इसकी गंभीर कहानी ज्यादा पसंद नहीं आई और फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई. लेकिन समय के साथ यह फिल्म फैमिली वैल्यू और भारतीय संस्कृति को खूबसूरती से दिखाने वाली फिल्मों में शामिल हो गई.

फ्लॉप फिल्मों ने ही बनाया ऋषि कपूर को अमर: ऋषि कपूर के करियर की ये फिल्में भले ही रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाईं, लेकिन समय के साथ लोगों के दिलों में बस गईं. इन फिल्मों ने साबित किया कि असली सफलता सिर्फ कमाई से नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों पर लंबे समय तक राज करने से मिलती है. यही वजह है कि ऋषि कपूर आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और यादगार सितारों में गिने जाते हैं.

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