लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) में क्या सब कुछ ठीक चल रहा है या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव पास आते-आते पार्टी के भीतर कुछ दरारें सामने होने लगी हैं. सवाल इसलिए क्योंकि यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कमाल अख्तर के मुताबिक उन्होंने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के कहने पर इस्तीफा दिया है. लेकिन सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तैर रही हैं. मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान. पोस्टरों से तस्वीरों का गायब होना, अलग-अलग शक्ति केंद्रों का बनना और फिर दोनों नेताओं को अखिलेश यादव का लखनऊ बुलाना. यह सब महज स्थानीय विवाद था, इत्तेफाक था. या समाजवादी पार्टी के भीतर किसी सत्ता संघर्ष की झलक है.
कमाल अख्तर ने इस्तीफा दिया या मांगा गया?
इस सवाल का जवाब कमाल अख्तर के बयान में ही छिपा है. उन्होंने साफ तौर से कहा कि अखिलेश यादव उनके नेता हैं, इसलिए उनके आदेश पर उन्होंने इस्तीफा दिया है. उन्होंने जो कहा है उनके शब्द कुछ इस तरह के हैं कि जब उनसे पूछा कि क्या आप नाराज हैं? तो उन्होंने कहा नाराजगी किस बात की?
नाराजगी तो तब होती है कि आदमी अपने को नेता मानता. हम तो कार्यकर्ता हैं. 30 साल से नारे लगाते आए हैं. मुलायम सिंह जिंदाबाद, अखिलेश यादव जिंदाबाद और आगे भी यही करते रहेंगे. ये जो एक उनका दर्द है वो आप समझ सकते हैं कि भले ही उन्होंने एक अच्छे कार्यकर्ता की तरह अपने नेता के ऑर्डर का पालन किया है, लेकिन अपने बयान में शब्दों के जरिए अपना कष्ट भी बयां कर गए.
सवाल उठता है कि क्या मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा पार्टी में इतनी प्रभावशाली हैं कि वह सपा अध्यक्ष से कहलवाकर मुख्य सचेतक का इस्तीफा दिला दें. रुचि वीरा के राजनीतिक सफर पर नजर डालने पर एक बड़ी इमेज नजर आती है. बहुत कद्दावर नेता हैं, लेकिन उनके पीछे आजम खान खड़े दिखते हैं. इससे यह समझ में आता है कि कमाल अख्तर के इस्तीफे में जेल में कैद आजम खान का रोल समझ में आता है.
रुचि वीरा भले ही सांसद हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी में वह कितने आगे तक जाएंगी ये भली भांति समझा जा सकता है. साथ ही रुचि वीरा इतनी ताकतवर नेता नहीं हैं कि वह अखिलेश यादव से इतना बड़ा फैसला करवा लें. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी वजह से पूरे खेल में आजम खान के नाम की चर्चा है.
समाजवादी पार्टी के इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पता चलता है कि कमाल अख्तर जामिया मिलिया बैकग्राउंड से आते हैं. वह छात्र राजनीति से उभरकर आए हैं. इन्होंने जामिया से इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएशन किया. उसके बाद लॉ की डिग्री हासिल की. पार्टी में जब आए तो सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव इनके अंदर कुछ देखा और इन्हें सपा यूथ विंग की जिम्मेदारी सौंप दी.
यहां से समझ में आता है आजम खान का खेल
वहीं से एक दूसरी कहानी शुरू होती है. उस समय सपा में आजम खान का पार्टी में प्रभुत्व था. वह नहीं चाहते थे कि पार्टी में कोई ऐसा मुस्लिम चेहरा उभरे जो उनके लिए चुनौती खड़ी कर सके. इसी वजह से कमाल अख्तर का राष्ट्रीय स्तर पर लॉचिंग आजम साहब को खटकने लगा था. उस समय की नाराजगी अब जाकर दिख रही है. 2004 में कमाल अख्तर को पार्टी ने राज्य सभा भेजा, तो पार्टी के अंदर और मुस्लिम समाज के बीच इनका कद बढ़ने लगा. 2012 से ये हसनपुर में विधानसभा चुनाव लड़े और जीते. उसके बाद मंत्री भी बने. 2012 से 17 तक सपा सरकार में पंचायत राज मिनिस्टर रहे. 2015 में अखिलेश यादव ने इनका प्रोफाइल बढ़ाते हुए खाद्य विभाग भी सौंप दिया.
उसके बाद 2019 में अचानक कुछ ऐसी परिस्थिति बनी जब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का अलायंस हुआ था. उस वक्त चर्चा बहुत जोरों से हुई कि कमाल अख्तर को मुरादाबार से सांसदी का टिकट मिल रहा है. उस वक्त आजम खान ने इसपर सीधे नाराज नहीं हुए, बल्कि मुरादाबाद के कुछ लोगों को उकसाकर आवाज उठवाई कि यहां बाहरी प्रत्याशी नहीं चलेगा. जिले में पोस्टरबाजी शुरू हो गई.
इसके बाद अखिलेश यादव को यह लगा कि कहीं ये मुद्दा ज्यादा ना गरमा जाए. इसके बाद उन्होंने कमाल अख्तर को पीछे हटने का इशारा कर दिया. उसी घटनाक्रम में एक नासिर कुरैशी हैं जो समाजवादी पार्टी के अबू आसिम आजमी के करीबी थे. उनके जरिए किसी तरीके से पहुंच बनाकर नासिर कुरैशी मुरादाबाद से सांसदी का टिकट पा लिए. टिकट और सिंबल लेकर चले गए.
इसके बाद आजम खान को जब पता चला तो उन्होंने फौरन बिना कोई देर किए विरोध किया. यहां तक कि रामपुर के पूर्व चेयरमैन अजर खान की अगुवाई में एक कमेटी बनाई और पत्र लिखकर अखिलेश यादव के सामने विरोध जताया गया. पार्टी ने आजम खान साहब को चुनाव के लिए एक गाड़ी दी थी, जिसे उन्होंने वापस कर दिया. उसकी चाबी लौटा दी गई. आखिरकार नासिर कुरैशी का टिकट कटा और आजम खान की सिफारिश पर डॉक्टर एसटी हसन को मुरादाबाद से प्रत्याशी बनाया गया. 2024 में आजम खान ने उसी एसटी हसन को टिकट कटवा दिया और रुचि वीरा को प्रत्याशी बनवाया. कहा जा रहा है कि अब आजम खान चाहते हैं कि मुरादाबाद में रुचि वीरा को ही आगे बढ़ाया जाए.











