पूर्वांचल: उत्तर प्रदेश की पहचान उसकी बोली, भाषा और वहां की खास संस्कृति से होती है. इन सभी का मेल प्रदेश के ‘पूर्वांचल’ में देखने को मिलता है, जो उत्तर प्रदेश की धड़कन माना जाता है. कहते हैं कि ‘पूर्वांचल’ के बिना प्रदेश अधूरा है और उसकी पहचान इसी से होती है. अपने इतिहास, संस्कृति, राजनीति और भाषाई विविधता के लिए पूरे देश में ‘पूर्वांचल’ अलग पहचान रखता है. गंगा, घाघरा, सरयू और राप्ती जैसी नदियों से घिरा यह इलाका प्राचीन सभ्यताओं से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक का खास केंद्र रहा है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर पूर्वांचल बना कैसे और इसमें कौन-कौन से जिले शामिल हैं?
क्या है ‘पूर्वांचल’ का मतलब?
जानकारों के अनुसार, ‘पूर्वांचल’ शब्द का सीधा मतलब है ‘पूर्व दिशा का अंचल’ यानी उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में स्थि जिले ‘पूर्वांचल’ के लिस्ट में आते हैं. यह कोई प्रशासनिक राज्य या मंडल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान वाला क्षेत्र है. समय-समय के साथ यहां के जिलों को उनकी भाषा, संस्कृति और सामाजिक समानताओं के आधार पर पूर्वांचल का हिस्सा माना जाने लगा और फिर धीरे-धीरे ये क्षेत्र अपनी अलग पहचान बनाने लगा.
पूर्वांचल में कौन-कौन से जिले शामिल?
हालांकि ‘पूर्वांचल’ की कोई आधिकारिक सीमा नहीं है, लेकिन भाषा और संस्कृति के आधार पर प्रदेश के कुछ जिलों को ‘पूर्वांचल’ की लिस्ट में शामिल किया गया है, जिसमें वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, भदोही, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज के कुछ हिस्से और आसपास के कई जिले शामिल माने जाते हैं.
इतिहास से जुड़ा है गहरा नाता
कहते हैं कि ‘पूर्वांचल’ का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है और इसमें शामिल जिला वाराणसी को दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में गिना जाता है. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था. वहीं कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ. ‘पूर्वांचल’ की सबसे बड़ी पहचान यहां बोली जाने वाली भाषाएं हैं जिसमें भोजपुरी, अवधी और पूर्वी हिंदी का मेल है. इसके साथ ही लोकगीत, बिरहा, कजरी और चैता जैसे लोकसंगीत ने इस क्षेत्र को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया है.
राजनीति में भी रहा मजबूत प्रभाव
उत्तर प्रदेश का राजनीति में भी ‘पूर्वांचल’ की अहम भूमिका मानी जाती है. ‘पूर्वांचल’ लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा है. कई बड़े नेता इसी क्षेत्र से निकले और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई. इसमें लाल बहादुर शास्त्री, चंद्र शेखर, मुलायम सिंह यादव और फूलन देवी जैसे खास चेहरे शामिल हैं. यही वजह है कि चुनावों के दौरान पूर्वांचल की सीटों को बेहद अहम माना जाता है. इन सभी कारणों से पूर्वांचल सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है.











