अपने किरदार से जब डरे नवाजुद्दीन सिद्दीकी, किलर की मानसिकता समझने के लिए की तैयारी

Last Updated:July 19, 2026, 08:22 IST

नवाजुद्दीन सिद्दीकी चैलेंजिंग रोल निभाने के लिए जाने जाते हैं. मगर फिल्म ‘रमन राघव 2.0’ में वह अपने ही रोल से डर गए थे. साल 2016 में रिलीज हुई इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सीरियल किलर का खौफनाक रोल निभाया था मगर इसकी तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं ता. शूटिंग से पहले कुछ दिनों के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी सुनसान जगह पर अकेले रहने लगे थे. खुद को पूरी तरह किरदार में ढालने के लिए वह लगातार खुद से कहते थे कि मैं मार सकता हूं.

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खूंखार सीरियल किलर के रोल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने उड़ा दिए थे होश.

नई दिल्ली. डायरेक्टर अनुराग कश्यप की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘रमन राघव 2.0’ साल 2016 में रिलीज हुई थी. यह आज भी आधुनिक हिंदी सिनेमा की सबसे खतरनाक और हिलाकर रख देने वाली फिल्मों में गिनी जाती है. इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सीरियल किलर रमन का ऐसा खौफनाक किरदार निभाया था, जिसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे. अब नवाजुद्दीन ने बताया कि रमन एक ऐसा किरदार है, जिसे निभाते वक्त वह डर गए थे.

न्यूज18 इंडिया के मैनेजिंग एडिटर किशोर अजवानी के शो ‘कहके रहेगा कहने वाला’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने ‘रमन राघव 2.0’ में अपने किरदार को लेकर बात की. उनसे पूछा गया कि क्या कोई ऐसा कैरेक्टर जिससे आपको खुद को ही डर लगा हो? इस पर जवाब देते हुए नवाजुद्दीन ने रमन का नाम लिया. उन्होंने कहा, ‘बेशक! रमन राघव था. रमन बोलता था कि इंसान धर्म की आड़ लेकर मारता है, समाज की आड़ लेकर मारता है, कानून की आड़ लेकर मारता है लेकिन मैं तो सपाट मारता हूं. इस चीज यकीन करना बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं तो ऐसा नहीं हूं लेकिन मुझे किरदार निभाना है.’

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कैसे की किरदार के लिए तैयारी?

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने आगे कहा, ‘जो आदमी खाते-पीते किसी को भी मार देता है और उसे कोई तकलीफ नहीं होती है, ऐसे आदमी की सोच पर यकीन बहुत मुश्किल था. फिर मैं 5-6 दिनों के लिए एकांत में चला गया था और यकीन करने की कोशिश कर रहा था कि मैं रमन हूं और मैं मार सकता हूं. पांच दिनों तक मैं यही खुद से बोलता रहा कि मैं भी ऐसा ही हूं और मैं मार सकता हूं और मुझे दर्द भी नहीं होगा. लेकिन नवाज को तो दर्द होता है और नवाज ने आज तक किसी को थप्पड़ भी नहीं मारा.’

खुद को दिलाना पड़ता है यकीन

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर इस तरह का किरदार निभाना है तो खुद को यकीन दिलाना पड़ता है. कुल मिलाकर एक्टिंग इसी बारे में है कि आप अपने आपको सीरियसली वैसा ही समझने लगे. खुद को यकीन दिलाने की कई सारी एक्सरसाइज होती हैं. तो जब मैं 5 दिन के बाद वापस आया तो मैं यकीन करने लगा कि मैं कि मैं रमन हूं.’

खुद से ही डरने लगे थे नवाजद्दीन सिद्दीकी

इंटरव्यू के दौरान जब पूछा कि क्या आपको डर नहीं लगा कि मैं ऐसा हो गया हूं? जवाब में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ‘बेशक! मैं खुद से ही डरने लगा था. अब चूंकि करना पड़ेगा. मैं अगर एक-दो महीने उस किरदार में रह लूंगा तो क्या फर्क पड़ेगा. हमारा काम भी यही है. उसके बाद वो मेरी लाइफ से चला गया और मैंने हाथ जोड़कर कहा थैंक्यू वेरी मच.’

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Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …

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