OPINION: तमन्ना भाटिया को ‘छठी मैया’ गाने के लिए क्यों मिल रहा इतना प्यार?

नई दिल्ली. इंडियन सिनेमा में त्योहारों की हमेशा से खास अहमियत रही है. बॉलीवुड ने करवा चौथ, ईद, दिवाली और होली के लिए अनगिनत सदाबहार गाने बनाए हैं, लेकिन लोक आस्था का सबसे मुश्किल और पवित्र त्योहार छठ अक्सर मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा के सेंटर स्टेज से दूर रहा है. हालांकि, भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री हर साल हजारों छठ गाने बनाती है, जो लाखों भक्तों की भावनाओं को दिखाते हैं. इसलिए फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ के गाने ‘छठी मैया’ का रिलीज होना और उसमें बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया का दिखना, एक लैंडमार्क कल्चरल इवेंट बन गया है.

रिलीज के सिर्फ तीन दिनों में 27 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिलना यह साबित करता है कि दर्शक न सिर्फ इस एक्सपेरिमेंट की तारीफ कर रहे हैं, बल्कि इससे इमोशनली भी जुड़ रहे हैं. तमन्ना भाटिया को इस पारंपरिक तरीके के लिए मिल रहे इतने प्यार के पीछे कई गहरे सोशल, सिनेमाई और इमोशनल कारण हैं.

A-लिस्ट बॉलीवुड एक्ट्रेस का पहला बड़ा कदम
इतिहास में यह पहली बार है कि कोई मेनस्ट्रीम A-लिस्ट बॉलीवुड एक्ट्रेस सीधे किसी बड़े बजट की हिंदी फिल्म में छठी मैया की पूजा करते हुए स्क्रीन पर आई है. अब तक छठ पूजा को बड़े पर्दे पर ऊपरी तौर पर दिखाया जाता था या रीजनल सिनेमा तक ही सीमित रखा जाता था. तमन्ना भाटिया जैसी पैन-इंडिया पहचान वाली ग्लोबल स्टार को इस पवित्र त्योहार के पहनावे, आस्था और सादगी को अपनाते देखना दर्शकों के लिए सचमुच एक खास अनुभव था. जब कोई बड़ी एक्ट्रेस हाथ में ‘सूप और दौरा’ लेकर स्क्रीन पर छठी मैया को प्रणाम करती है, तो यह बॉलीवुड का नॉर्थ इंडियन कल्चर के प्रति सम्मान भी दिखाता है.

आस्था की पवित्रता और तमन्ना के भक्ति भरे अंदाज
छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि बहुत ज्यादा अनुशासन, भक्ति और पवित्रता का एक बड़ा त्योहार है. इस गाने में तमन्ना भाटिया की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने इसे एक कमर्शियल डांस नंबर की तरह नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव की तरह जिया. उनके चेहरे पर भक्ति, आंखों में समर्पण और उनके पारंपरिक भारतीय कपड़े (लाल-पीली साड़ी, बालों की मांग में सिंदूर और पारंपरिक गहने) इतने असली थे कि दर्शकों को कभी लगा ही नहीं कि वे कोई परफॉर्मेंस देख रहे हैं. तमन्ना के सहज और भक्ति भरे अंदाज ने लोगों का दिल तुरंत जीत लिया.

क्षेत्रवाद से आगे बढ़कर मुख्यधारा में आना गर्व का पल
भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री सालों से मधुर और लोकप्रिय छठ गीत बना रही है, जिन्हें हर साल लाखों बार सुना जाता है. हालांकि, एक बड़े बजट की मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्म में छठ गीत का शामिल होना भोजपुरी और पूर्वांचल संस्कृति के लिए गर्व का पल बन गया है. यह गीत सिर्फ बिहार या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपनी भव्यता और बड़ी पहुंच के कारण पूरे देश और दुनिया भर में भारतीय समुदाय में ट्रेंड कर रहा है. जब किसी की संस्कृति को मुख्यधारा के सिनेमा में इतनी भव्य और सम्मानजनक जगह मिलती है, तो दर्शकों का उस पर प्यार बरसाना स्वाभाविक है.

‘हनुमान अंश’ का रिकॉर्ड तोड़ना
‘हनुमान अंश’ जैसी आध्यात्मिक फिल्मों के गानों ने भक्ति संगीत के लिए एक नया बेंचमार्क सेट किया है. हालांकि, ‘छठी मैया’ गाने ने सिर्फ 72 घंटों में 27 मिलियन से ज्यादा व्यूज पाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है. यह रिकॉर्ड तोड़ने वाला आंकड़ा न सिर्फ तमन्ना की स्टार पावर को दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय दर्शक अभी भी अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक संगीत से जुड़ने के लिए उत्सुक हैं. सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​की मौजूदगी और तमन्ना की सेंट्रल परफॉर्मेंस ने गाने की पहुंच को कई गुना बढ़ा दिया है. वहीं, गाने की सफलता का क्रेडिट काफी हद तक इसके म्यूजिक, लिरिक्स और विजुअल ट्रीटमेंट को जाता है. पारंपरिक छठ गीतों की भावना को बनाए रखते हुए मॉडर्न ऑर्केस्ट्रेशन का मिश्रण बेहद मधुर है. घाट का सीन, डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य देने की शूटिंग और तमन्ना का भक्ति हर फ्रेम में जान डाल देता है. यह गाना न सिर्फ कानों को अच्छा लगता है बल्कि आंखों को भी पवित्र शांति देता है.

तमन्ना भाटिया का ‘छठी मैया’ का अवतार सिर्फ एक हिट गाना नहीं है, यह बॉलीवुड में कल्चरल इनक्लूसिविटी का एक नया चैप्टर है. यह साबित करता है कि जब मेनस्ट्रीम सिनेमा देश की जड़ों से जुड़ी परंपराओं को पूरे सम्मान और असलियत के साथ दिखाता है, तो देश के दर्शक उसे बहुत सम्मान के साथ अपनाते हैं. यही वजह है कि तमन्ना भाटिया को ‘छठी मैया’ गाने में उनकी परफॉर्मेंस के लिए दुनिया के कोने-कोने से इतना प्यार और सम्मान मिल रहा है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

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dainikupeditor@gmail.com

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