BJP के लिए ‘गले की हड्डी’ बने SP के 7 बागी, कुछ तो शाह के दरबार में पहुंचे

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बात तो तय है यहां कब कौन सा पासा पलट जाए, कोई नहीं जानता. 2024 के राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) को झटका देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले ‘बागी’ विधायकों की वजह से अब बीजेपी के अंदर ही खलबली मच गई है. सपा से बगावत करके बीजेपी के पाले में आए 7 नेता अब अपनी-अपनी सीटों से बीजेपी का टिकट चाहते हैं. लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है. इन सीटों पर बीजेपी के अपने पुराने और वफादार नेता सालों से पसीना बहा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पार्टी किसे अपनाएगी और किसे मनाएगी?

1. अमेठी (गौरीगंज): राकेश प्रताप सिंह बनाम मटियारी, ब्राह्मण कार्ड का पेंच

अमेठी की गौरीगंज सीट पर मामला काफी दिलचस्प हो चुका है. सपा से बाहर किए गए मौजूदा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की मदद की थी. हाल ही में उन्होंने दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की है, जिससे साफ है कि वो बीजेपी से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

लेकिन रास्ता इतना आसान नहीं है. बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्रा उर्फ ‘मटियारी’ भी इसी सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं. 2022 में मटियारी, राकेश प्रताप से चुनाव हार गए थे. अब बीजेपी के सामने धर्मसंकट यह है कि अगर वो बागी राकेश प्रताप को टिकट देती है, तो मटियारी का क्या होगा? पार्टी को मटियारी को एमएलसी (MLC) या कहीं और एडजस्ट करना ही पड़ेगा, वरना स्थानीय समीकरण बिगड़ सकते हैं.

2. अयोध्या (गोशाईगंज): अभय सिंह और ‘खब्बू’ तिवारी के बीच जोरदार फाइट

अयोध्या की गोशाईगंज सीट हमेशा से हॉट सीट रही है. यहां से सपा उम्मीदवार के तौर पर जीते अभय सिंह ने भी अमित शाह से मुलाकात कर बीजेपी टिकट पर अपनी दावेदारी पक्की करने की कोशिश की है.

दूसरी तरफ, बीजेपी के पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी यानी ‘खब्बू तिवारी’ पूरा जोर लगा रहे हैं. खब्बू तिवारी 2017 में बीजेपी के टिकट पर अभय सिंह को हरा चुके हैं. 2022 में कोर्ट-कचहरी के चक्कर की वजह से उनकी पत्नी आरती तिवारी लड़ी थीं, जो दूसरे नंबर पर रही थीं. मिल्कीपुर उपचुनाव में बीजेपी की जीत के पीछे खब्बू तिवारी की ब्राह्मण वोटर्स में मजबूत पकड़ को बड़ा कारण माना गया. ऐसे में बीजेपी खब्बू तिवारी को इग्नोर करने का जोखिम शायद ही उठाए, क्योंकि इसका असर अयोध्या और अंबेडकर नगर के ब्राह्मण वोट बैंक पर पड़ सकता है.

3. बदायूं (बिसौली): आशुतोष मौर्य और कुशाग्र सागर आमने-सामने

बदायूं जिले की बिसौली सीट से सपा के बागी विधायक आशुतोष मौर्य अब बीजेपी का कमल थामकर चुनावी मैदान में उतरना चाहते हैं. लेकिन यहां पहले से ही पूर्व विधायक योगेंद्र सागर के बेटे कुशाग्र सागर ताल ठोक रहे हैं. कुशाग्र ने 2017 में बीजेपी के लिए यह सीट जीती थी और 2022 के कड़े मुकाबले में दूसरे नंबर पर रहे थे. अब देखना होगा कि पार्टी बागी आशुतोष पर दांव लगाती है या अपने पुराने साथी कुशाग्र पर.

4. जालौन (कालपी): विनोद चतुर्वेदी का मुकाबला छोटे सिंह से

कालपी सीट पर मुकाबला सपा के बागी विनोद चतुर्वेदी और 2022 में निषाद पार्टी (बीजेपी गठबंधन) के प्रत्याशी रहे छोटे सिंह के बीच है. 2022 के चुनाव में विनोद चतुर्वेदी ने छोटे सिंह को महज 2,800 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. अब जब विनोद खुद बीजेपी के करीब आ चुके हैं, तो छोटे सिंह की दावेदारी और निषाद पार्टी के गणित को संभालना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा.

5. अंबेडकर नगर (जलालपुर): पिता-पुत्र की रणनीति और पुराने दिग्गजों की दौड़

जलालपुर सीट की कहानी थोड़ी अलग है. यहां से सपा के बागी राकेश पांडे विधायक हैं. हालांकि, हाल ही में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा हुई, तो राकेश पांडे गायब थे, लेकिन उनके बेटे रितेश पांडे मंच पर मौजूद थे. रितेश पांडे 2017 में बीएसपी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं और माना जा रहा है कि वो खुद या अपने पिता के लिए बीजेपी टिकट का दावा ठोक सकते हैं.

दूसरी तरफ, बीजेपी के टिकट पर 2022 का चुनाव लड़ चुके पूर्व सपा विधायक सुभाष चंद्र राय और 2017 में बीजेपी प्रत्याशी रहे राजेश सिंह भी रेस में बने हुए हैं.

6. रायबरेली (ऊंचाहार): मनोज कुमार पांडे का रास्ता साफ या नया मोड़?

रायबरेली की ऊंचाहार सीट पर सपा के पूर्व कद्दावर नेता और मौजूदा मंत्री मनोज कुमार पांडे का दबदबा माना जाता है. 2022 में उन्होंने बीजेपी के अमरपाल मौर्य को 6,000 से ज्यादा वोटों से हराया था. बीजेपी ने अमरपाल मौर्य को पहले ही राज्यसभा भेज दिया है और बीजेपी ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है. इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडे को आसानी से मैदान में उतार सकती है और अंदरूनी बगावत का खतरा यहां काफी कम है.

7. कौशांबी (चायल): पूजा पाल और बीजेपी का ओबीसी कार्ड

कौशांबी की चायल सीट से सपा की बागी विधायक पूजा पाल की दावेदारी बेहद मजबूत मानी जा रही है. पूजा पाल को जून 2026 में उत्तर प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा चुकी है. प्रयागराज और कौशांबी के इलाके में पूजा पाल का ओबीसी (OBC) समुदाय के बीच अच्छा-खासा प्रभाव है. 2022 में उन्होंने अपना दल (एस) के प्रत्याशी नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 13,000 से ज्यादा वोटों से हराया था. ऐसे में बीजेपी उन्हें टिकट देकर इस पूरे इलाके में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहेगी.

बीजेपी के लिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती?

सपा से आए बागियों ने बीजेपी की ताकत तो बढ़ाई है, लेकिन टिकट बंटवारे के वक्त यह उनके लिए गले की फांस भी बन सकता है. एक तरफ वो बागी नेता हैं जिन्होंने पार्टी की मदद की है, तो दूसरी तरफ वो पुराने कार्यकर्ता और उम्मीदवार हैं जो 5 साल से जमीन पर पसीना बहा रहे हैं.

अगर बीजेपी बागियों को टिकट देती है, तो पुराने नेताओं में नाराजगी का डर है. वहीं अगर बागियों को टिकट नहीं मिलता, तो गठबंधन का भरोसा टूट सकता है. अब देखना यह होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस ‘टिकट युद्ध’ को कैसे शांत करता है और किसे चुनावी मैदान में उतारता है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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