Last Updated:September 05, 2026, 13:56 IST
पांच सितंबर को पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन के जयंती पर शिक्षक दिवस के रूप में याद किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं भारतीय क्रिकेट के ऐसे ही उन महान गुरु के बारे में जिन्होंने देश के लिए हीरे तराशे.
भारत के उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. कहा जाता है कि एक अच्छे शिक्षक के बिना सफलता का शिखर छूना असंभव है. चाहे वह पढ़ाई-लिखाई हो या फिर खेल, खास तौर पर खेल में गुरु सिर्फ उसकी बारीकियां ही नहीं सिखाता, बल्कि मैदान पर हर चुनौती से लड़ना भी सिखाता है. यही कारण है कि हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर खेल से जुड़े उन महान गुरुओं को भी याद किया जाता है, जिन्होंने जिन्होंने देश के लिए सिर्फ खिलाड़ी नहीं, हीरा तराशने का काम किया.
इस लिस्ट में पहला नाम भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और रमाकांत आचरेकर का है. सचिन को सफलता के शिखर पर पहुंचाने में उनके कोच रमाकांत आचरेकर सर का बहुत बड़ा योगदान रहा है. आचरेकर सर सचिन को बचपन में शिवाजी पार्क के नेट्स पर प्रैक्टिस कराते थे. आचरेकर सर की कड़ी मेहनत और अनुशासन ने ही सचिन को क्रिकेट का ‘भगवान’ बनाया.
दिग्गज विराट कोहली को क्रिकेट का किंग बनाने में उनके बचपन के कोच राजकुमार शर्मा का बहुत बड़ा योगदान रहा है. राजकुमार सर ने विराट को सिर्फ क्रिकेट के दांव-पेच ही नहीं सिखाए, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत बनाया. जब विराट के सिर से पिता का साया उठ गया था, तब राजकुमार सर ने उन्हें संभाला और अगले ही दिन मैच खेलने के लिए प्रेरित किया. सफलता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद आज भी विराट कोहली अपने कोच का बहुत सम्मान करते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
भारत को अपनी कप्तानी में दो-दो विश्व कप जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी को सबसे पहले उनके स्कूल के कोच केशव रंजन ने तराशा था. रांची के श्यामली में जब धोनी फुटबॉल के गोलकीपर हुआ करते थे, तब केशव रंजन ने ही उनकी फुर्ती को देखकर उन्हें क्रिकेट में विकेटकीपिंग के लिए प्रेरित किया. केशव सर के दिए बचपन के गुरुमंत्र ने माही को दुनिया का सबसे सफल कप्तान बनाया.
भारतीय क्रिकेट टीम के हिटमैन कहे जाने वाले रोहित शर्मा को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में उनके बचपन के गुरु दिनेश लाड का बहुत बड़ा हाथ है. बेहद गरीब परिवार से आने वाले रोहित को शुरुआत में दिनेश लाड ने न सिर्फ क्रिकेट के गुर सिखाए, बल्कि उन्हें अपने बेटे की तरह माना. दिनेश लाड ने रोहित को अनुशासन के साथ-साथ बल्लेबाजी में गेंदबाजों को धराशाई करने के तरीके भी सिखाए. सरफलता की शिखर पर पहुंचने के बाद भी रोहित आज भी अपने पहले गुरु के सम्मान में सिर झुकाते हैं.
ऋषभ पंत आज वर्ल्ड क्रिकेट में एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन उनको यहां तक पहुंचाने का श्रेय उनके बचपन के कोच तारक सिन्हा को जाता है. जब ऋषभ उत्तराखंड से दिल्ली आए थे, तब तारक सिन्हा ने उनकी आक्रामक शैली को पहचाना और उसे सही दिशा दी. वे ऋषभ की हर गलती पर उन्हें डांटते भी थे और पिता की तरह लाड़ भी करते थे.
भारत के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को आज भला कौन नहीं जानता. सिर्फ 15 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू कर वैभव ने सनसनी मचा दी, लेकिन वैभव को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके कोच मनीष ओझा की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी रही है. मनीष ओझा ने वैभव की प्रतिभा को बहुत कम उम्र में पहचान लिया था और उनके खेल की तकनीकी कमियों को दूर किया. मनीष ओझा का मार्गदर्शन और वैभव की अटूट मेहनत का ही परिणाम है कि वह इतनी कम उम्र में पूरी दुनिया में छा गए हैं.
First Published :
September 05, 2026, 13:56 IST










