नई दिल्ली. क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी सिर्फ मैच जीतने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास के पन्ने पलटने और खेल के नए मानक सेट करने के लिए आते हैं. साल 2000 का वह दौर याद कीजिए, जब सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम जीत के रथ पर सवार होकर आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी (अब चैंपियंस ट्रॉफी) के फाइनल में पहुंची थी. भारत की जीत तय लग रही थी, लेकिन तभी बीच में खड़ा हो गया न्यूजीलैंड का एक ऐसा ऑलराउंडर, जिसने अकेले दम पर करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ दिया. नाम था- क्रिस केर्न्स (Chris Cairns). क्रिस केर्न्स आज अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं.
न्यूजीलैंड की जर्सी में मैदान पर उतरने वाला यह खिलाड़ी जब गेंद हाथ में लेता तो अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के पसीने छूट जाते थे और जब बल्ला थामता तो अलग ही धमाल मचाता था. लेकिन किस्मत का खेल देखिए, जिस खिलाड़ी को न्यूजीलैंड क्रिकेट का ‘क्रिसमस’ कहा जाता था, जिंदगी के दूसरे हाफ में उसे फिक्सिंग के काले कलंक, कंगाली और अपंगता ने इस कदर तोड़ा कि वो अर्श से सीधे फर्श पर आ गिरा.
जब अकेले छीना भारत से आईसीसी खिताब
साल 2000, नैरोबी का मैदान. आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड के सामने 265 रनों का मजबूत लक्ष्य रखा था. उस दौर में इस स्कोर को पार करना लोहे के चने चबाने जैसा था. न्यूजीलैंड ने 132 रन पर अपने 5 प्रमुख विकेट गंवा दिए थे. भारतीय खेमे में जश्न का माहौल था, लेकिन क्रिस केर्न्स के इरादे कुछ और ही थे. घुटने की गंभीर चोट के बावजूद वह क्रीज पर डटे रहे. उन्होंने क्रिस हैरिस के साथ मिलकर न सिर्फ पारी को संभाला, बल्कि भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं. केर्न्स ने 113 गेंदों पर नाबाद 102 रनों की ऐसी ऐतिहासिक पारी खेली, जिसने भारत के मुंह से खिताबी जीत का निवाला छीन लिया. यह न्यूजीलैंड का पहला आईसीसी खिताब था और केर्न्स रातों-रात कीवी देश के सबसे बड़े हीरो बन चुके थे.
फिक्सिंग की’कालिख’ और कोर्ट के चक्कर
केर्न्स का करियर जितना चमकदार था, उसका अंत उतना ही अंधकारमय रहा. साल 2008 में जब वह बागी लीग ‘इंडियन क्रिकेट लीग’ (ICL) में चंडीगढ़ लायंस के कप्तान थे, तब उन पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे. आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने सरेआम उन पर फिक्सिंग का आरोप लगाया, जिसके बाद केर्न्स ने उन पर मानहानि का मुकदमा किया और जीत भी गए, लेकिन केर्न्स की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. उनके ही पूर्व साथी खिलाड़ी ब्रेंडन मैकुलम और लू विंसेंट ने कोर्ट में गवाही देते हुए कहा कि केर्न्स ने उन्हें फिक्सिंग के लिए एप्रोच किया था. हालांकि, 2015 में लंदन की अदालत ने उन्हें झूठी गवाही के आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन इस कानूनी लड़ाई ने केर्न्स को पूरी तरह तोड़ दिया. उनका पैसा पानी की तरह बहा और साख मिट्टी में मिल गई.
कंगाली और ट्रक धोने की नौबत
मुकदमों के खर्च ने केर्न्स को कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया. एक समय आलीशान जिंदगी जीने वाला यह सुपरस्टार अपने परिवार का पेट पालने के लिए ऑकलैंड काउंसिल में टैंक साफ करने, ट्रक धोने और बस शेल्टर पर काम करने को मजबूर हो गया. केर्न्स ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके पास अपने बच्चों के लिए डायपर खरीदने तक के पैसे नहीं बचे थे.
किस्मत की दोहरी मार: व्हीलचेयर और कैंसर
कहते हैं कि वक्त जब आंखें फेरता है, तो हर तरफ से मार पड़ती है. 2021 में केर्न्स को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनकी महाधमनी (Aorta) फट गई. उनकी जान तो बच गई, लेकिन स्पाइनल स्ट्रोक के कारण उनके दोनों पैर हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गए और केर्न्स व्हीलचेयर पर आ गए. इसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें आंत के कैंसर का पता चला.










