Last Updated:July 02, 2026, 14:15 IST
Dina Guru Kachori Varanasi: बनारस के ठठेरी बाजार की तंग गलियों में स्थित दीना गुरु की हींग वाली कचौड़ी स्वाद के शौकीनों के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है. करीब 65 साल पुरानी इस दुकान पर आज भी गैस के बजाय कोयले की भट्टी की धीमी आंच पर बिना लहसुन-प्याज की कचौड़ियां तैयार की जाती हैं. दुकान के मालिक दीनानाथ मिश्रा का दावा है कि इन कचौड़ियों में हींग के साथ लौंग, दालचीनी और जावित्री जैसे आयुर्वेदिक मसालों का इस्तेमाल होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत रखते हैं. यही वजह है कि शाम 4 से 7 बजे के बीच महज 3 घंटे में ही उनकी कचौड़ियां पूरी तरह खत्म हो जाती हैं.
बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के करीब ही ठठेरी बाजार के तंग गलियों में दीना गुरु के हींग वाली कचौड़ी की दुकान है.गलियों में प्रवेश के बाद इनका नाम पूछते-पूछते आप इनकी छोटी सी दुकान पर आसानी से पहुंच भी जाएंगे. कचौड़ी के शौकीनों के लिए यह जगह बनारस की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है.
वैसे तो इनका नाम दीनानाथ मिश्रा है. लेकिन बनारस में हर कोई एक दूसरे को गुरु करकर बुलाता है. इसलिए यह दीना गुरु के नाम से पूरे बनारस में फेमस है. दीना गुरु आज भी गैस पर नहीं बल्कि कोयले के भट्टी के धीमे आंच पर हींग वाली कचौड़ियों को तैयार करते है.
दीनानाथ का दावा है कि उनके कचौड़ियों में आयुर्वेदिक औषधियां शामिल है. इसलिए हर मौसम में इसे खाया जा सकता है. इसे खाने से किसी तरह का कोई नुकसान भी नहीं है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक इसलिए क्योंकि इसमें हींग के साथ दालचीनी, लौंग, जावित्री जैसे मसालों का प्रयोग किया जाता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
यह मसाले पेट को किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं. बल्कि इनका यदि संयमित सेवन किया जाए तो इससे शरीर का पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. यही वजह है कि महज 3 घण्टे में उनकी कचौड़ियां खत्म हो जाती है. दुकान खुलने के साथ ही ग्राहकों की भीड़ लगती है. लोगों को दुकान खुलने का इंतजार रहता है.
दीना गुरु ने बताया की शाम 4 बजे से 7 बजे तक ही वह कचौड़ियां बेचते हैं. हालांकि इसे बनाने की तैयारी घण्टों पहले से ही शुरू हो जाती है. दीनानाथ ने बताया कि इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले आलू को अच्छी तरह से धोया जाता है.
फिर उसे उबालकर, उसके छिलके को उतारा जाता है. इसके बाद आलू को धीमी आंच पर अच्छे से भूना जाता है.फिर मसालों को पीस कर उसे आलू में मिलाकर भूना जाता है. इसके बाद आलू के इस मसाले को मैदे की रोटी में भरकर उसे कचौड़ी बनाई जाती है. फिर उसे धीमी आंच पर छानकर कचौड़ियां बनाई जाती है.
दीनानाथ बिना लहसून प्याज वाली कचौड़ी खिलाते है. चने की सब्जी और चटनी के साथ हींग वाली कचौड़ी को लोगों को परसोते हैं. हींग की कचौड़ियों की खुशबू इसके चाहने वालो को यहां तक ले आती है. दीना गुरु की चटनी भी बेहद खास होती है. जिसे पुदीने से तैयार किया जाता है.
इस कचौड़ी का स्वाद चखने देश नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते है. आज से करीब 65 साल पहले दीनानाथ और उनके भाई सत्यनारायण मिश्रा ने इसकी शुरुआत की थी. उस समय वो आलू टिक्की बेचते थे. उसके कुछ साल बाद ही दीना गुरु ने हींग वाली कचौड़ी बनानी शुरू कर दी जिसका स्वाद आज भी बरकरार है. यदि आप भी बनारस आ रहें हैं तो इस हींग वालो कचौड़ी का स्वाद चखना मत भूलिएगा.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
Source










