TMC Controversy: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर पिछले कई हफ्तों से बगावत का विवाद चल रहा है। गुरुवार, 2 जुलाई को बंगाल की सियासी हलचल के बीच टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट के लोगों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की।
अब इस मामले पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए ममता बनर्जी के अलावा, बागी गुटों को भी नोटिस भेजा है और इसे लेकर दोनों से जवाब भी मांगा है। आयोग का यह कदम पार्टी के भीतर गहराते मतभेद के बीच आया है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के चिन्हों और प्रशासन पर वैधता का दावा कर रहा है।
6 जुलाई को शाम 5:30 बजे तक जवाब मांगा
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ऋतब्रत बनर्जी ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए चुनाव आयोग के पूर्ण पीठ से मुलाकात की। बैठक के बाद, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दी गई “धैर्यपूर्वक सुनवाई” पर संतोष व्यक्त किया। इस बीच ममता बनर्जी खेमे ने बागी गुट के आयोग से मिलने के फैसले को पार्टी नियम उल्लंघन बताया है। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को सोमवार, 6 जुलाई को शाम 5:30 बजे तक अपने जवाब जमा करने का निर्देश दिया।
ऋतब्रत बनर्जी ने क्या कहा?
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा ‘22 जून को एक विशेष सत्र आयोजित किया गया था और नियमों के अनुसार हमने उसके तुरंत बाद अपने प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग (ईसीआई) के समक्ष भेजा था। हमने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए थे और अनुरोध किया था कि हम पूर्ण पीठ से मिलना चाहते हैं।’
आगे उन्होंने कहा ‘इसलिए, हम चुनाव आयोग को धन्यवाद देना चाहेंगे कि पूर्ण पीठ ने हमारे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को समय दिया। उन्होंने हमारी बात धैर्यपूर्वक सुनी। मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों ने कहा कि वे हमसे संपर्क करेंगे।’
इन लोगों की कोई विश्वसनीयता नहीं है- TMC सांसद सौगत रॉय
चुनाव आयोग द्वारा अलग हुए गुट से बातचीत करने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रतिद्वंद्वी गुट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऋतब्रत बनर्जी को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है।”
आगे उन्होंने कहा ‘इन लोगों की कोई विश्वसनीयता नहीं है। हमारा सवाल यह है कि इन्हें अलग से बैठक क्यों कराई गई? इन्हें अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इन्हें क्या अधिकार है, या ये पार्टी का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकते हैं?।’
यह कोई गुट नहीं है-सागरिका घोष
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने प्रतिद्वंद्वी गुट को निष्कासित सदस्य के नेतृत्व वाला एक अवैध समूह बताकर खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि ईसीआई नियमों के तहत, केवल अधिकृत पार्टी हस्ताक्षरकर्ताओं को ही पार्टी का प्रतिनिधित्व करने या आयोग से मिलने का कानूनी अधिकार है।
घोष ने आगे कहा ‘यह कोई गुट नहीं है। ये तो बस कुछ लोग हैं जो अचानक कहीं से इकट्ठा हो गए हैं। इनके ‘स्व-घोषित नेता’ को पार्टी से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। आयोग के अपने नियमों के अनुसार, केवल पार्टी का अधिकृत प्रतिनिधि या नामित हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग को पत्र लिख सकता है और उनसे मिल सकता है। कोई और मिलने का समय नहीं मांग सकता।
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