Last Updated:June 15, 2026, 18:00 IST
एक ऐसा खिलाड़ी जिसके बारे में आज के क्रिकेट फैंस शायद ही जानते होंगे. 77 साल पहले उनका बनाया रिकॉर्ड आज तक सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी नहीं तोड़ पाए. बाबासाहेब निम्बालकर के नाम रणजी इतिहास का सबसे बड़ा 443 रन का व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है.
भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है बल्कि इससे कहीं ज्यादा बढ़कर माना जाता है. इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय खिलाड़िओं ने बहुत सारे ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिसे तोड़ना नामुमकिन है. इस लिस्ट में सबसे पहला नाम सचिन तेंदुलकर का आता है. इसके बाद विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे ने खिलाड़ी आते हैं. एक रिकॉर्ड ऐसा है जिसे अब तक सचिन और विराट भी नहीं तोड़ पाए.
सचिन और विराट कोहली के बनाए रिकॉर्ड नई पीढ़ी के बल्लेबाज एक एक कर तोड़ रहे हैं. एक ऐसा कीर्तिमान है जिसे सचिन, विराट समेत किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने नहीं छुआ. पिछले 77 सालों से इसके आस पास भी कोई नहीं पहुंचा. उस रिकॉर्ड को बनाने वाले खिलाड़ी के खिलाफ खेलना ही विरोधी टीम ने छोड़ दिया था.
सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर जैसे कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाए हैं. भाऊसाहेब बाबासाहेब निम्बालकर के रिकॉर्ड के पास कोई नहीं पहुंचा. उनके नाम रणजी क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड है. एक मैच में इस बैटर ने अकेले ही 443 रन बना डाले थे.
Add News18 as
Preferred Source on Google
महाराष्ट्र टीम के लिए खेलने वाले निंबालकर ने 1948-49 रणजी ट्रॉफी में काठियावाड़ टीम के खिलाफ 443 रन की नाबाद पारी खेलकर इतिहास रच दिया था. पुणे में हुए उस मैच में निंबालकर तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने विरोधी गेंदबाजी को तहस-नहस कर 443 रन बनाए. इसमें 49 चौके और 1 छक्का शामिल था. यह रिकॉर्ड आज तक रणजी ट्रॉफी इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है.
उस समय दुनिया में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज सर डॉन ब्रैडमैन के नाम था. उन्होंने साल 1930 में 452 रन बनाए थे. अगर निंबालकर 10 रन और बना लेते तो ब्रैडमैन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ देते. दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका.
निंबालकर आउट नहीं हुए थे. उनकी जबरदस्त बल्लेबाजी देखकर काठियावाड़ टीम के खिलाड़ी डर गए. लंच ब्रेक के दौरान मैच छोड़कर मैदान से बाहर चले गए. तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे निंबालकर ने करीब 16 घंटे तक बल्लेबाजी की. इसी वजह से निंबालकर को 443 रन पर नॉट आउट रहकर अपनी पारी खत्म करनी पड़ी.
विश्व फर्स्ट क्लास क्रिकेट इतिहास में चौथा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी निंबालकर के नाम दर्ज है. आज भी भारतीय खिलाड़ी द्वारा फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड निंबालकर के नाम है. भारत में कितने भी दिग्गज खिलाड़ी आए हों, 77 सालों से यह रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया है. इतना ही नहीं, भारतीय क्रिकेट में फर्स्ट क्लास मैचों में 400 रन पार करने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी निंबालकर ही हैं.
इसमें दुख की बात यह है कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले निंबालकर ने भारतीय टेस्ट टीम के लिए एक भी मैच नहीं खेला. अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का मौका निंबालकर को नहीं मिला. 1948 में बनाए गए उनके 443 रन का रिकॉर्ड 77 साल बाद भी भारतीय क्रिकेट इतिहास में अमिट स्थान रखता है.










