रावण वध पर भगवान राम को लगा दोष, इस जगह किया था प्रायश्चित, जहां कटते हैं पाप!
Last Updated:March 11, 2026, 10:27 IST
Dhopap Temple Sultanpur: त्रेतायुग में जब रावण ने सीता जी का हरण किया था, तो दंड स्वरूप भगवान राम ने रावण का वध कर दिया. लेकिन इससे उनको दोष लगा, जिसका उन्होंने प्रायश्चित गोमती नदी में स्नान करके किया. वह स्थान धोपाप मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है. आइए जानते हैं धोपाप मंदिर के बारे में.
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के किनारे धोपाप मंदिर है. (IANS)
Dhopap Temple Sultanpur: त्रेतायुग में भगवान राम ने सीता हरण के दंड स्वरूप रावण का वध कर दिया. रावण वध की वजह से उन पर जो दोष लगा, उससे मुक्ति के लिए वे गोमती नदी के किनारे पहुंचे. वहां पर उन्होंने प्रायश्चित किया था. आज उस जगह पर एक अद्भुत मंदिर है, जहां पर लोग नदी स्नान करके जन्मों के पापों से मुक्ति पाते हैं. उस जगह को धोपाप के नाम से जानते हैं.
गोमती नदी के किनारे है धोपाप मंदिर
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा धोपाप मंदिर और घाट आस्था, इतिहास और आत्मशुद्धि का अनुपम संगम है. मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर इसी स्थान पर गोमती नदी में स्नान कर प्रायश्चित किया था. तभी से इस जगह का नाम ‘धोपाप’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘पापों को धोने वाला’.
धोपाप मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि इसका प्राकृतिक सौंदर्य भी मनमोहक है. गोमती के शांत बहाव, हरे-भरे किनारे और सौम्य वातावरण यहां आने वाले हर श्रद्धालु को अद्भुत सुकून प्रदान करता है. यह स्थल आस्था और इतिहास के अनूठे संगम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.
डुबकी लगाने से मिटते हैं पाप
धार्मिक मान्यता है कि यहां डुबकी लगाने से मन के अपराध, कर्मों की अशुद्धियां और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती हैं, और भीतर गहरी शांति और पवित्रता का अनुभव होता है. धोपाप घाट गोमती नदी के दाहिने किनारे पर कादीपुर गांव में स्थित है.
विष्णु पुराण में है गोमती का वर्णन
विष्णु पुराण में गोमती नदी को इस क्षेत्र में ‘धुतोपपा’ के नाम से जाना गया है. नदी यहां एक लूप बनाकर दक्षिण-पूर्व में मोड़ लेती है, जिसके कारण यह स्थान और भी पवित्र माना जाता है.
दशहरा-रामनवमी पर लगती है भक्तों की भीड़
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दशहरा या रामनवमी के दिन यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. धोपाप में भगवान राम का एक सुंदर मंदिर है, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है. मंदिर परिसर में घाट पर स्नान करने के बाद भक्त दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं.
प्रतिवर्ष गंगा दशहरा, चैत्र राम नवमी और ज्येष्ठ स्नान मेले के दौरान यहां भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है. इन अवसरों पर विशेष पूजा, हवन और कीर्तन का आयोजन होता है. लोग दूर-दूर से परिवार सहित आते हैं और गोमती में स्नान कर आशीर्वाद लेते हैं.
कैसे पहुंचे धोपाप मंदिर?
- धोपाप मंदिर ट्रेन से पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन लम्भुआ जंक्शन है, जो सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जयपुर, भोपाल और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. स्टेशन से मंदिर तक ऑटो या टैक्सी से 20-25 मिनट में पहुंचा जा सकता है.
- धोपाप मंदिर सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ विकास खंड में तहसील लम्भुआ के अंतर्गत आता है. सुल्तानपुर शहर से लगभग 32 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और अयोध्या से करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धोपाप मंदिर सुल्तानपुर-जौनपुर रोड यानी एनएच-56 से आसानी से पहुंचा जा सकता है. लोहरामऊ मंदिर से यह स्थान मात्र 8 किलोमीटर दूर है.
- वहीं, सुल्तानपुर से लम्भुआ 22 किलोमीटर है, जो सुल्तानपुर-वाराणसी राजमार्ग पर पड़ता है. फैजाबाद से 60 किमी, प्रयागराज से 103 किमी, लखनऊ से 135 किमी, वाराणसी से 162 किमी और दिल्ली से लगभग 630 किमी की दूरी है. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें भी नियमित चलती हैं.
- मंदिर से निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज है, जो सुल्तानपुर से करीब दो घंटे की ड्राइव पर है. दूसरा विकल्प लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो 148 किलोमीटर दूर है. दोनों एयरपोर्ट से टैक्सी या कैब बुक कर धोपाप पहुंचा जा सकता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें
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First Published :
March 11, 2026, 10:27 IST










