Last Updated:September 15, 2026, 13:13 IST
After Hanuman Ansh Another Epic Saga Bala Goriya: सिनेमाघरों में इन दिनों सिर्फ ग्लैमर और मसाला नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ी कहानियां भी दर्शकों को खींच रही हैं. आस्था और लोकविश्वास की इस कड़ी में अब उत्तराखंड की एक ऐसी गाथा पर्दे पर आने वाली है, जिसे पहाड़ों में न्याय और विश्वास से जोड़ा जाता है. एक राजकुमार की जिंदगी, अपनों की साजिश, मौत के बाद चमत्कार और फिर देवता के रूप में पूजा… कहानी न्याय के देवता गोलू देवता की. ये फिल्म भी जल्द सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा में इस वक्त आस्था, संस्कृति और लोक-मान्यताओं पर आधारित फिल्मों की एक नई और मजबूत बयार बह रही है. हाल ही में संत नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर वो कमाल करके दिखा दिया. सिर्फ 2 करोड़ में बेहद सीमित संसाधनों में बनी फिल्म ने 300 करोड़ी क्लब में शामिल होने वाली है. फिल्म को रिलीज हुए 40 दिनों से ज्यादा हो गई है और फिल्म अभी भी सिनेमाघरों में डटी हुई हैं. ‘हनुमान अंश’ ने साबित कर दिया कि भारतीय दर्शक अपनी जड़ों और लोक-विश्वास से जुड़ी कहानियों को देखने के लिए आतुर हैं. ‘हनुमान अंश’ की इस जबरदस्त सफलता के बाद, अब देवभूमि उत्तराखंड की एक और महान लोक-गाथा बड़े पर्दे पर उतरने के लिए तैयार है. कुमाऊं के परम पूज्य और न्याय के देवता माने जाने वाले गोलू देवता के जीवन की कहानी भी पर्दे पर नजर आने वाली.
‘हनुमान अंश’ ने आस्था और विश्वास की कहानी को पर्दे पर उतारकर दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बनाई है. अब इसी कड़ी में उत्तराखंड की लोकआस्था से जुड़ी एक और कहानी बड़े पर्दे पर दस्तक देने जा रही है. जिसका नाम है ‘बाला गोरिया’. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
इस बार कहानी है गोलू देवता की, जिन्हें कुमाऊं में न्याय का देवता माना जाता है. फिल्म ‘बाला गोरिया’ 16 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है. फिल्म चंपावत के गोलू देवता की लोकगाथा, उनके बलिदान और उस विश्वास की कहानी कहेगी, जिसके चलते आज भी भक्त न्याय की उम्मीद लेकर उनके मंदिरों में अर्जी लगाते हैं. ‘बाला गोरिया’ को फैंटेसी और हिस्ट्री की शैली में बनाया गया है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
Add News18 as
Preferred Source on Google
‘बाला गोरिया’ की कहानी कुमाऊं के चंपावत की पहाड़ियों से शुरू होती है. फिल्म में बालू गोला को राजा झाल राय और रानी कालिंका के बहादुर और दयालु पुत्र के रूप में दिखाया गया है. बचपन से ही बाला में असाधारण साहस और न्याय की भावना दिखाई देती है. वह समाज में होने वाले अन्याय पर सवाल उठाता है और कमजोरों के पक्ष में खड़ा होता है. धीरे-धीरे बाला आम लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगता है. लेकिन उसकी बढ़ती लोकप्रियता दरबार में बैठे लोगों और उसके सौतेले भाइयों को खटकने लगती है. यहीं से कहानी में साजिशों का दौर शुरू होता है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
आईएमबीडी में जारी जानकारी के मुताबिक, फिल्म की कहानी के मुताबिक बाला को उसके ही करीबियों की साजिश का शिकार होना पड़ता है. उसे झूठे आरोप में फंसाया जाता है और मौत की सजा सुना दी जाती है. सबसे बड़ा मोड़ तब आता है, जब बाला बदला लेने के बजाय अपने भाग्य को स्वीकार करने का रास्ता चुनता है. वह अन्याय के सामने टूटता नहीं, बल्कि अपने बलिदान को स्वीकार करता है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
उसकी मृत्यु के बाद इलाके में कई ऐसी घटनाएं होने लगती हैं, जिन्हें लोग उसके दिव्य अस्तित्व से जोड़ते हैं. यहीं से एक राजकुमार की कहानी धीरे-धीरे गोलू देवता की लोकआस्था में बदलने लगती है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
‘बाला गोरिया’ सिर्फ किसी लोकदेवता की महिमा बताने वाली कहानी नहीं है. इसका केंद्रीय भाव सत्य, बलिदान, न्याय और विश्वास है. फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि किस तरह एक राजकुमार ने अपने जीवन में न्याय को सबसे ऊपर रखा और उसकी मृत्यु के बाद वही विश्वास पीढ़ियों तक लोगों की आस्था बन गया. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
‘हनुमान अंश’ के बाद ‘बाला गोरिया’ का आना इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों फिल्मों का आधार अलग होने के बावजूद केंद्र में आस्था और विश्वास है. एक तरफ ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की कहानी और उनकी शिक्षाओं के जरिए आध्यात्मिक यात्रा दिखाई गई, वहीं ‘बाला गोरिया’ कुमाऊं की लोकगाथा और गोलू देवता के न्याय से जुड़े विश्वास को पर्दे पर लाने जा रही है.
उत्तराखंड में गोलू देवता की आस्था का संबंध सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं है. चंपावत का गोलू देवता मंदिर, घोड़ाखाल गोलू देवता मंदिर और चितई गोलू देवता मंदिर इस लोकविश्वास के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. घोड़ाखाल और चितई जैसे मंदिरों में भक्त अपनी परेशानियां और फरियाद लिखकर देवता को अर्पित करते हैं. यही, परंपरा फिल्म की कहानी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. फिल्म अतीत और वर्तमान को जोड़ते हुए दिखाती है कि कैसे बाला के बलिदान की कथा समय के साथ न्याय के देवता में बदल गई. कहा जाता है कि भक्त अपनी अर्जी कागज पर लिखकर मंदिर में चढ़ाते हैं और न्याय की उम्मीद रखते हैं. यही वजह है कि गोलू देवता को खास तौर पर न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
September 15, 2026, 13:13 IST










