Last Updated:August 26, 2026, 18:52 IST
Mahoba Flood News: महोबा के ऐतिहासिक गांव दिसरापुर में मूसलाधार बारिश के बाद कीरत और कल्याण सागर के तेज बहाव में मुख्य सड़क और 6 महीने पहले बनी पुलिया बह गई. 100 मीटर सड़क कटने से गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है. घरों में पानी भरने से राशन बर्बाद हो गया है और ग्रामीण कैद हैं. ग्रामीणों ने PWD पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए डीएम से तुरंत वैकल्पिक रास्ते, मजबूत पुल और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
Mahoba Flood News: बुंदेलखंड के महोबा जिले में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. वीर योद्धा आल्हा-ऊदल की ऐतिहासिक धरती माना जाने वाला दिसरापुर गांव इस समय भीषण जलभराव और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है. रात भर हुई तेज बारिश के बाद इलाके के प्रमुख तालाबों कीरत सागर और कल्याण सागर का पानी उफान पर आ गया. जब यह तेज बहाव दिसरापुर की ओर बढ़ा, तो गांव को जिला मुख्यालय और नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली मुख्य सड़क और उस पर बनी पुलिया ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गई. लगभग 100 मीटर पक्की सड़क पानी के तेज वेग में समा जाने के कारण पूरा गांव अलग-थलग पड़ गया है और ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं.
PWD पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप: 6 महीने में ही ढह गई पुलिया
इस हादसे के बाद ग्रामीणों में लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रति भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुलिया को पानी का तेज बहाव बहा ले गया, उसका निर्माण महज 6 महीने पहले ही पूरा हुआ था. ग्रामीणों ने निर्माण के समय ही चेताया था कि यहां पानी का दबाव काफी ज्यादा रहता है, इसलिए बड़े और मजबूत पुल की जरूरत है. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया और एक छोटी पुलिया खड़ी कर दी. पहली ही जोरदार बारिश ने विभाग के दावों और गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी.
घरों में घुसा पानी, राशन और सामान बर्बाद
सड़क बहने और जलस्तर बढ़ने से दिसरापुर गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है. रिहायशी इलाकों और घरों के भीतर कई फीट तक पानी भर गया है. इसके चलते लोगों के घरों में रखा अनाज, राशन और रोजमर्रा का घरेलू सामान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. खेतों से लेकर गांव की गलियों तक केवल पानी का सैलाब दिखाई दे रहा है, जिससे पशुओं के चारे और पेयजल का भी भारी संकट खड़ा हो गया है.
मरीजों को गोद में उठाने की लाचारी, बच्चे-मजदूर सब फंसे
मुख्यालय से संपर्क मार्ग पूरी तरह कट जाने के कारण गांव में मानवीय संकट गहरा गया है:
- स्वास्थ्य सेवाएं ठप: बीमार लोगों और बुजुर्गों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना नामुमकिन हो गया है. गंभीर स्थिति में लोग मरीजों को गोद या खाट पर उठाकर किसी तरह पानी पार कराने की कोशिश कर रहे हैं.
- शिक्षा और रोजगार पर ब्रेक: मुख्य रास्ता बह जाने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और रोज कमाने-खाने वाले मजदूर काम पर जाने से वंचित हो गए हैं.
- राहत सामग्री का अभाव: मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से प्रशासन की राहत सामग्री और निर्माण कार्य का सामान भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है.
प्रशासन और डीएम से तुरंत मदद की गुहार
ग्राउंड जीरो पर मौजूद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी (DM) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों की मांग है कि PWD विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए. आवागमन बहाल करने के लिए तुरंत वैकल्पिक रास्ते और नावों का इंतजाम किया जाए. भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए एक नए, ऊंचे और मजबूत पुल का निर्माण जल्द शुरू कराया जाए.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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Mahoba,Uttar Pradesh
First Published :
August 26, 2026, 18:52 IST











