Last Updated:May 08, 2026, 17:36 IST
Maharajganj news: महराजगंज जिले में दो बड़े बौद्ध कालीन ऐतिहासिक स्थल रामग्राम और देवदह मौजूद हैं. जो जिले के सबसे बड़े ऐतिहासिक स्थलों में शामिल हैं. वहीं लक्ष्मीपुर क्षेत्र में स्थित देवदह में बौद्ध काल से जुड़े प्रमाण भी मिल चुके हैं और कई बार उत्खनन भी हो चुका है. देवदह में उत्खनन के बाद तत्कालीन समय के रिंग वेल भी मिल चुके हैं और बहुत से प्राचीन अवशेष मिल चुके हैं जो इसे बौद्ध काल के इतिहास से जोड़ते हैं.
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महराजगंज: ऐतिहासिक स्थल देवदह जिले के लक्ष्मीपुर क्षेत्र में है. जो अपने अंदर बौद्ध कालीन इतिहास को समेटे हुए हैं और आज भी उसके निशान यहां पर देखने का मिलते हैं. महराजगंज जिले के अलग-अलग हिस्सों में बौद्ध काल से जुड़े ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलते हैं जो तत्कालीन समय के इतिहास को दर्शाते हैं. गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं और आने वाले समय में यह एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में लोकप्रिय होगा. इसके आसपास के क्षेत्र में भी तेजी से बदलाव हो रहा है जो एक सकारात्मक संदेश देता है.
देवदह में मिल चुके हैं बौद्धिकालीन इतिहास के अवशेष
महराजगंज जिले में दो बड़े बौद्ध कालीन ऐतिहासिक स्थल रामग्राम और देवदह मौजूद हैं. जो जिले के सबसे बड़े ऐतिहासिक स्थलों में शामिल हैं. वहीं लक्ष्मीपुर क्षेत्र में स्थित देवदह में बौद्ध काल से जुड़े प्रमाण भी मिल चुके हैं और कई बार उत्खनन भी हो चुका है. देवदह में उत्खनन के बाद तत्कालीन समय के रिंग वेल भी मिल चुके हैं और बहुत से प्राचीन अवशेष मिल चुके हैं जो इसे बौद्ध काल के इतिहास से जोड़ते हैं.
जिले के चर्चित लेखक डॉ. परशुराम गुप्त बताते हैं कि देवदह में बौद्ध काल से जुड़ी कई जानकारियां सामने आ चुकी हैं जो हमें गौतम बुद्ध के इतिहास के नजदीक ले जाते हैं. उन्होंने बताया कि जब लुंबिनी में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ तो उनके जन्म के एक सप्ताह के अंदर ही उनकी मां का देहावसान हो गया था. इसके बाद उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने उनके ननिहाल में ही उनका पालन पोषण किया. उनकी मौसी ने ही बचपन में उन्हें उनके मां के देहांत के बाद उन्हें संभाला और ऐसे में गौतम बुद्ध के बचपन का एक बड़ा समय देवदह में ही बीता.
बौद्ध परिपथ योजना से जुड़ेगा रामग्राम और देवदह
डॉ. परशुराम गुप्त बताते हैं कि बड़े होने के बाद भी जब गौतम बुद्ध अपने ननिहाल वापस आते थे तो देवदह के पास मौजूद पुष्करणी के आस पास टहलते थे. वर्तमान समय में भी वह पुष्करणी देवदह में मौजूद है जिसका एक बड़े स्तर पर जीर्णोद्धार किया जा रहा है. उन्होने कहा कि जैसे ही रामग्राम और देवदह दोनों ही जगह की प्रामाणिकता सिद्ध हो जाती है इन्हें बौद्ध परिपथ योजना से जोड़ दिया जाएगा. इसके साथ ही इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और विश्व के अलग-अलग देशों से बौद्ध पर्यटक यहां आना शुरू हो जाएंगे. वर्तमान समय की बात करें तो इस क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है जो यहां के स्थिति में काफी परिवर्तन ला रहा है और निकट भविष्य में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवागमन का संकेत देता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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Maharajganj,Mahrajganj,Uttar Pradesh











