Last Updated:August 26, 2026, 12:44 IST
Who is BSP candidate Asmita Chand: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने बाहुबली हरिशंकर तिवारी के गढ़ में अस्मिता चंद को प्रत्याशी बनाया है. चिल्लूपार विधानसभा सीट से हरिशंकर तिवारी पांच बार विधायक रह चुके हैं. वहीं अस्मिता चंद भी बड़े राजनीतिक परिवार से आती हैं. लेकिन खास बात यह है कि अस्मिता की राजनीतिक राह हमेशा परिवार के विपरीत ही रही है. अस्मिता अपने ससुर के खिलाफ 2007 में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं. अभी तक वह बीजेपी से टिकट पाने की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन मंसूबा पूरा नहीं होने पर वह बीएसपी में आईं और यहां से टिकट भी पा ली हैं.
अस्मिता चंद हाल ही में बीजेपी छोड़कर बीएसपी में आई हैं.
गोरखपुर: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) आगामी यूपी चुनाव में मजबूती से लड़ाई में उतरने का प्रयास कर रही है. इसी वजह से बीएसपी अभी से कई सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर रही है. बीएसपी सुप्रीमो मायावती का मानना है कि समय से उम्मीदवार घोषित किए जाने से प्रत्याशी का तैयारी का पर्याप्त मौका मिलता है. इसी कड़ी में बीएसपी ने गोरखपुर-बस्ती मंडल में चिल्लूपार विधानसभा सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा की है. बीएसपी ने यहां से अस्मिता चंद को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है.
कौन हैं अस्मिता चंद?
अस्मिता चंद का राजनीतिक सफर बेहद इंट्रेस्टिंग रहा है. वह करीब 20 साल से सक्रिय राजनीति कर रही हैं. पिछले तीन चुनाव से वह सत्ताधारी बीजेपी से टिकट पाने का प्रयास करती रही हैं. कहा जाता है कि 2022 के चुनाव में बीजेपी से आश्वासन मिलने के बाद भी उन्हें टिकट नहीं मिला था. इसके बाद से अस्मिता ने अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए बीजेपी को छोड़कर पूरे परिवार (दो बेटे और एक बेटी) के साथ बीएसपी की सदस्यता ले चुकी हैं. बीएसपी ने भी उनपर भरोसा करते हुए चिल्लूपार सीट से उन्हें प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है.
अस्मिता चंद का परिवार पहले से राजनीति में सक्रिय रहा है. चिल्लूपार में अस्मिता के ससुर राजनारायण चंद ब्लॉक प्रमुख रहे हैं. वहीं उनके ससुर के बड़े भाई मारकंडेय चंद यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा अस्मिता के जेठ रणविजय चंद जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रहे हैं. मारकंडेय चंद के बेटे सीपी चंद बीजेपी की तरफ से एमएलसी भी हैं. हालांकि अस्मिता ने बीएसपी का दामन थामकर अपनी राजनीतिक राह परिवार से अलग कर चुकी हैं.
ससुर के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी हैं अस्मिता
अस्मिता लंबे समय से राजनीतिक ताकत पाने के प्रयास में लगी रही हैं. 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में वह धुरियापार विधानसभा सीट से बीजेपी का टिकट चाहती थीं. लेकिन आखिरी वक्त में यह टिकट उनके ससुर मारकंडेय चंद को मिल गया था. इसके बाद अस्मिता ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपने ससुर के खिलाफ दावेदारी ठोक दी थीं. उस चुनाव में ससुर और बहू की लड़ाई में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को लाभ मिल गया था. सपा प्रत्याशी राजेंद्र सिंह उर्फ पहलवान सिंह चुनाव जीत गए थे. चुनाव में ससुर मारकंडेय चंद को 27,686 वोट और बहू अस्मिता को 7,723 वोट मिले थे.
इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में सीपी चंद चिल्लूपार से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे. वहीं अस्मिता बीजेपी प्रत्याशी के लिए काम कर रही थीं. इस चुनाव में सीपी चंद को 25.23% वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे थे. राजेश त्रिपाठी बसपा के टिकट पर 30.81% वोट के साथ चुनाव जीते थे.
सीपी चंद को साल 2016 में समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद भेज दिया. कुछ ही दिन बाद वह बीजेपी में चले गए और उसी पार्टी से एमएलसी हैं. वहीं अस्मिता चंद भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष का पद भी संभाल चुकी हैं.
हरिशंकर तिवारी का इलाका है चिल्लूपार
यहां याद करा दें कि गोरखपुर का चिल्लूपार विधानसभा सीट पूर्व मंत्री और बाहुबली हरिशंकर तिवारी का क्षेत्र है. हरिशंकर तिवारी चिल्लूपार से पांच बार विधायक रह चुके हैं. 2017 में उनके बेटे विनय शंकर तिवारी बीएसपी के टिकट पर यहां से विधायक चुने गए थे. 2022 में विनय शंकर सपा के टिकट पर उतरे, लेकिन हार गए. इस सीट पर अस्मिता के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं. चिल्लूपार में दलितों की करीब एक लाख आबादी है. वहीं क्षत्रीय समाज का भी अच्छा प्रभाव है.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर (सहयोगी संपादक) पद पर कार्यरत हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक…
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First Published :
August 26, 2026, 12:44 IST










