जहां परशुराम ने पिता के आदेश पर काटा था माता का सिर, जौनपुर का यह स्थान है बेहद पवित्र

Last Updated:March 11, 2026, 12:55 IST

जमैथा गांव में स्थित यह पवित्र स्थल भगवान परशुराम और उनके माता-पिता से जुड़ी धार्मिक कथाओं की याद दिलाता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह स्थान गहरी आस्था और इतिहास का प्रतीक बना हुआ है।

जौनपुर: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध जौनपुर में भगवान परशुराम की जन्मस्थली भी बताई जाती है. जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित जमैथा गांव को वह पवित्र स्थान माना जाता है जहां महर्षि जमदग्नि का आश्रम था और यहीं भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. धार्मिक मान्यता के अनुसार यही वह स्थान है जहां पितृभक्त भगवान परशुराम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया था.

ऋषि जमदग्नि का आश्रम और मां रेणुका का मंदिर

जमैथा क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित एक शांत और सुरम्य स्थान था. इसी स्थान को महर्षि जमदग्नि ने अपनी तपोभूमि बनाया था. वह यहां अपनी पत्नी माता रेणुका और पुत्र परशुराम के साथ निवास करते थे. समय के साथ यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया और यहां ऋषि जमदग्नि का आश्रम तथा माता रेणुका का मंदिर स्थापित हुआ.

मंदिर के महंत राजन बताते हैं कि पुराणों के अनुसार एक दिन महर्षि जमदग्नि ने किसी कारणवश क्रोधित होकर अपने पुत्र परशुराम को आदेश दिया कि वह अपनी माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दें. पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानने वाले परशुराम ने बिना किसी संकोच के उनका आदेश मान लिया और माता का सिर काट दिया.

क्या है पौराणिक कथा

महंत राजन के अनुसार भगवान परशुराम की यह पितृभक्ति और आज्ञाकारिता का अद्भुत उदाहरण माना जाता है. हालांकि, बाद में जब महर्षि जमदग्नि का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने परशुराम से वर मांगने को कहा. तब परशुराम ने अपनी माता को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की. पुत्र की इस इच्छा पर प्रसन्न होकर महर्षि जमदग्नि ने माता रेणुका को आशीर्वाद देकर पुनः जीवित कर दिया.

माता रेणुका का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र

उन्होंने बताया कि आज भी जमैथा गांव में स्थित माता रेणुका का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है. यहां माता को अखड़ा देवी के रूप में पूजा जाता है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.

महंत राजन का कहना है कि इस क्षेत्र का इतिहास भी महर्षि जमदग्नि से जुड़ा हुआ माना जाता है. उनके नाम पर ही इस स्थान को पहले जमदग्निपुरम कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर जौनपुर हो गया.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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Location :

Jaunpur,Jaunpur,Uttar Pradesh

First Published :

March 11, 2026, 12:51 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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