Last Updated:March 11, 2026, 13:04 IST
धर्म नगरी काशी को सर्व विद्या की राजधानी कहा जाता है.इस प्राचीन शहर में कई विश्वविद्यालय है.इसके अलावा यहां ढ़ेरों ‘वेद विद्यालय’ बहु है.इन वेद विद्यालयों में संस्कृत औऱ शास्त्र की पढ़ाई होती है.आधुनिक युग में भी इन विद्यालयों में संस्कृत की शिक्षा दीक्षा लेने वाले स्टूडेंट्स की भीड़ है.इन्ही विद्यालयों से ‘पंडित जी’ तैयार होते है.
वाराणसी में श्री काशी अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट द्वारा गुरुकुल आश्रम चलाया जाता है.इस आश्रम में ब्राह्मण बच्चों को वेद और शास्त्र की शिक्षा दी जाती है.शहर के शिवपुर इलाके में 27 एकड़ भूमि में यह वेद विद्यालय है.यहां पढ़ने वाले बच्चों को फ्री में भोजन,वस्त्र,दवा, पुस्तकें भी दी जाती है. इसके अलावा इस वेद विद्यालय में बटुकों को कम्प्यूटर का ज्ञान भी दिया जाता है.
परिणी कन्या महाविद्यालय भी शहर का काफी चर्चित वेद महाविद्यालय है.इस महाविद्यालय में सिर्फ कन्याओं को ही वेद का ज्ञान दिया जाता है.यह महाविद्यालय नारी सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाती है.इसी महाविद्यालय के कारण ही पारम्परिक पूजा अनुष्ठान में कन्याओं को भी बराबर का अधिकार दिलाया है.
शहर के अस्सी से सटे पुष्कर तालाब क्षेत्र में श्री ब्रह्म वेद विद्यालय है.इस वेद विद्यालय में संस्कृत,कर्मकांड और ज्योतिष के जानकार विद्वान ‘पंडित जी’ की नई पीढ़ी को तैयार करते है.उन्हें शुरुआती शिक्षा इन्ही वेद विद्यालयों में मिलती है. फिर ये बटुक आगे चलकर संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की पढ़ाई करतें है.
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श्री स्वामी नारायण तीर्थ वेद विद्यालय वाराणसी के अस्सी क्षेत्र में स्थित है.यह वेद विद्यालय शहर के पुराने वेद विद्यालयों में से एक है.यहां वाराणसी सहित आस पास के जिलो के स्टूडेंट्स वेद,कर्मकांड और संस्कृत की शिक्षा का ज्ञान लेने के लिए आते हैं.
इसके अलावा शहर में श्री काशी विश्वनाथ के नाम पर भी वेद विद्यालय है.मंदिर के करीब ही मीरघाट मुहल्ले में यह वेद विद्यालय है.इसका नाम श्री काशी विश्वनाथ संस्कृत वैदिक कर्मकांड वेद विद्यालय है.यह विद्यालय संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध है.इसके अलावा यहां पाराम्परिक वेद शाला भी है.
First Published :
March 11, 2026, 13:04 IST










