खरीफ सीजन में इस फसल पर लगाएं दांव! 7-9 महीने में मिलेगा शानदार रिटर्न, एक्सपर्ट से जानें

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खरीफ सीजन में इस फसल पर लगाएं दांव! 7-9 महीने में मिलेगा शानदार रिटर्न

Last Updated:July 02, 2026, 18:06 IST

How to Grow Suran: खरीफ के मौसम में सूरन की खेती किसानों के लिए बेहद मुनाफेदार साबित हो सकती है. कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह के अनुसार, इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन सड़ी गोबर की खाद के साथ संतुलित पोषण और सही जल निकासी का ध्यान रखकर किसान इसकी तगड़ी पैदावार ले सकते हैं. यह फसल 7 से 9 महीने में तैयार हो जाती है, जिसमें अन्य फसलों के मुकाबले रोग और कीटों का खतरा भी काफी कम होता है.

सुल्तानपुर: खरीफ का मौसम शुरू होने वाला है और इसके साथ ही खेतों में सूरन की बुवाई का समय भी आ गया है. पहले के समय में लोग घर के पीछे या बेकार पड़ी जमीन पर सिर्फ खाने भर के लिए सूरन रोप देते थे, जिसे अमूमन त्योहारों पर जमीन से निकालकर खाया जाता था. लेकिन अब समय बदल चुका है और किसान बड़े स्तर पर सूरन की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं. अगर आप भी इस खरीफ सीजन में सूरन की खेती करने की सोच रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसकी बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं. सूरन को कई जगहों पर जिमीकंद भी कहा जाता है. खरीफ के मौसम में इसकी खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इस दौरान इसे प्राकृतिक रूप से बढ़ने का पूरा समय मिलता है.

इस तरह तैयार करें खेत 
मिट्टी के बारे में बात करें तो सूरन की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. इसके लिए सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करना चाहिए और मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. जब खेतों की जुताई कर रहे हैं तो प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें. और जब कंदो का चयन करें तो इस बात का ध्यान रखें कि कंद रोगमुक्त रहें और लगाने से पहले फफूंदनाशी दवा से उपचार कर लें. जून से जुलाई के बीच 75 सेंटीमीटर कतार दूरी और 60 सेंटीमीटर पौध दूरी पर कंदों की बुवाई करना चाहिए.

खाद और सिंचाई का करें बेहतर प्रबंध 
कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर ए.के सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि सूरन की अच्छी पैदावार के लिए संतुलित पोषण और सही सिंचाई संसाधनों की आवश्यकता होती है. खरीफ के मौसम में बारिश के कारण अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बारिश न होने पर सिंचाई करना आवश्यक होता है. इस बात का ध्यान रहे कि खेत में जलभराव बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कंद सड़ सकता है. इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को हटाना जरूरी होता है.

रोग और कीट पर नियंत्रण, इस समय करें खुदाई
वैसे समानता या देखने को मिलता है कि अन्य फसलों की अपेक्षा सूरन में रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है लेकिन इस फसल में पत्ती झुलसा और कंद सड़न जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. इसके लिए खेत की नियमित निगरानी करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह अनुसार दवाओं का प्रयोग करना चाहिए. इसकी फसल लगभग 7 से 9 महीने में तैयार हो जाती है. जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें तो कंदों की खुदाई कर लेनी चाहिए. खुदाई सावधानीपूर्वक करें ताकि कंदों को नुकसान न पहुंचे.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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