Last Updated:August 26, 2026, 18:04 IST
Sultanpur Amhat History : ऐसे किस्से आपके आसपास भी कई होंगे. ब्रिटिश पीरियड में अपने यहां कई ऐसी इमारतें, बाजार और मोहल्ले बसाए गए, जिनके नाम आज भी चर्चा में रहते हैं. ऐसा ही एक नाम सुल्तालपुर में खूब सुनने को मिलता है. सुल्तानपुर के अमहट इलाके को भी ब्रिटिश काल में बसाया गया था. कहते हैं कि पहले यहां पर आम की हाट (बाजार) लगती थी. इसी वजह से धीरे-धीरे लोग इसे अमहट कहने लगे. लेकिन कई लोग इसे गलत मानते हैं. अमहट के रहने वाले हैदर लोकल 18 से बताते हैं कि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि लॉर्ड एमहर्स्ट के नाम से भी इसका कनेक्शन हो सकता है.
सुल्तानपुर. उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला कई ऐतिहासिक राज समेटे हुए है. ब्रिटिश पीरियड में यहां पर कई ऐसी बिल्डिंग बनाई गईं और कई ऐसे मोहल्ले बसाए गए जो आज भी सुर्खियों में रहते हैं. इस तरह सुल्तानपुर का अमहट इलाका भी बसाया गया, जिसका नाम आम से जुड़ा है. कहते हैं कि पहले यहां पर आम की हाट (बाजार) लगती थी. इसी वजह से धीरे-धीरे लोग इसे अमहट कहने लगे और यही नाम सुल्तानपुर के अभिलेखों में दर्ज हो गया है, लेकिन अमहट से जुड़ा दूसरा किस्सा भी है. हम जानेंगे अमहट नाम कैसे पड़ा.
शिया समुदाय का गढ़
अमहट के रहने वाले हैदर लोकल 18 से बताते हैं कि यहां पहले आम की बाजार लगा करती थी, जिसे आम का हाट कहा जाता था. हाट का मतलब बाजार है. आम के हाट की वजह से धीरे-धीरे उसका अपभ्रंश बन गया और दोनों शब्दों को एक करते हुए अमहट शब्द का इजाद हुआ. यह वह इलाका है, जहां ज्यादातर शिया समुदाय के लोग रहते हैं. 1857 की क्रांति में यहां के लोगों ने राजा हसनपुर के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत से खूब लड़ाई लड़ी.
क्या कहती है दूसरी मान्यता
हैदर अब्बास खान कहते हैं कि हालांकि अमहट नाम को लेकर लोगों में काफी मतभेद भी पाया जाता है. दूसरी मान्यता है कि लॉर्ड एमहर्स्ट के नाम पर इसे बसाया गया और धीरे-धीरे एमहर्स्ट का अपभ्रंश लोगों ने अमहट कहना शुरू कर दिया. हालांकि आम के हाट का विचार ज्यादा लोगों की तरफ झुकता है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि लॉर्ड एमहर्स्ट के नाम पर इसका नाम नहीं रहा होगा क्योंकि सुल्तानपुर शहर में कई ऐसे मोहल्ले बसाए गए जो अंग्रेजों के नाम पर थे. वे नाम आज भी इसी स्वरूप में चले आ रहे हैं, जैसे मेजरगंज और पार्किंसगंज.
आज कैसा है अमहट
आज सुल्तानपुर के अमहट का विकास तेजी से हो रहा है. इसका चौराहा सुल्तानपुर में बेहद मशहूर है. इसी इलाके से प्रदेश की राजधानी लखनऊ और बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी जाने के लिए एक राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है. यहां सुल्तानपुर जिले की सबसे बड़ी मंडी भी स्थापित है. सुल्तानपुर जिला कारागार भी इसी इलाके में पड़ता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Sultanpur,Uttar Pradesh
First Published :
August 26, 2026, 18:04 IST










