अयोध्या: रामलला की नगरी अयोध्या में सावन के पवित्र महीने के दौरान हुए मछली भोज को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है. विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस मुद्दे को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दल कांग्रेस व सपा पर निशाना साध रहे हैं. वहीं, स्थानीय लोगों की राय इस मामले में बंटी हुई नजर आ रही है. कोई इसे सनातन और धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहा है, तो कुछ लोग इसे व्यक्तिगत मामला बताते हुए चुनावी मुद्दा बनाने का विरोध कर रहे हैं.
सावन में मांस-मछली के सेवन को लेकर क्या बोले स्थानीय लोग
स्थानीय निवासी ओम प्रकाश का कहना है कि सावन के महीने में मांस-मछली का सेवन नहीं किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक यह सनातन की मान्यताओं के खिलाफ है और ऐसा आयोजन करना गलत है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना का असर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर पड़ सकता है. उनका मानना है कि सनातन में आस्था रखने वाला मतदाता ऐसे कार्यों को स्वीकार नहीं करेगा और चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है.
मछली भोज को राजनीतिक मुद्दा बनाने के खिलाफ ध्रुव गुप्ता
वहीं, ध्रुव गुप्ता की राय इससे अलग है. उन्होंने कहा कि जिस भोज की चर्चा हो रही है, उसका आयोजन कांग्रेस ने नहीं बल्कि कुछ स्थानीय लोगों ने किया था. उनके मुताबिक भाजपा इस मामले को राजनीतिक रंग देकर कांग्रेस और सपा को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.
ध्रुव ने कहा कि चुनाव में जनता किसी पार्टी के काम और विकास के आधार पर मतदान करेगी, इसलिए व्यक्तिगत आयोजन को चुनाव से जोड़ना उचित नहीं है.
धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी
हालांकि ध्रुव गुप्ता ने यह भी माना कि यदि सावन के पवित्र महीने में ऐसा आयोजन हुआ है तो यह धार्मिक भावनाओं के लिहाज से उचित नहीं है. उनका कहना है कि आयोजन करने वाले के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए किसी राजनीतिक दल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.
विकास और व्यवस्था भी हो सकते हैं चुनावी मुद्दे
स्थानीय निवासी सुनील ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि 2027 के चुनाव में बदलाव का माहौल बन सकता है. उन्होंने मछली भोज के साथ-साथ क्षेत्र में चोरी, भ्रष्टाचार और स्थानीय समस्याओं को बड़ा चुनावी मुद्दा बताया. उनके मुताबिक जनता इस बार विकास और व्यवस्था के आधार पर अपना फैसला कर सकती है.
धार्मिक मर्यादा को लेकर भी उठे सवाल
वहीं, शशिकांत दास ने मछली भोज को सामाजिक और धार्मिक मर्यादा के लिहाज से अनुचित बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन में धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. उनके अनुसार ऐसी घटनाओं का राजनीतिक दलों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
कांग्रेस को विवादों से बचने की सलाह
शशिकांत दास ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को इस तरह के विवादों से बचना चाहिए और जनता के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए.
2027 के चुनाव में कितना पड़ेगा असर
अयोध्या में सामने आए इन अलग-अलग मतों से साफ है कि मछली भोज का मुद्दा केवल धार्मिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि चुनाव में इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह आने वाले समय में जनता की प्राथमिकताओं और राजनीतिक दलों के प्रचार अभियान पर निर्भर करेगा.
फिलहाल अयोध्या में धर्म, आस्था, विकास, भ्रष्टाचार और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरमाता दिखाई दे रहा है.











