Last Updated:July 03, 2026, 13:20 IST
चित्रकूट के डॉ. विभांशु गुप्ता 17 साल से निशुल्क कैंसर जांच शिविर लगा रहे हैं. वे लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक कर रहे हैं और समय पर पहचान के लिए गांवों में कैंप लगाते हैं. कैंसर का सबसे बड़ा खतरा इसकी देर से पहचान है. आज भी चित्रकूट में ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव और आर्थिक परेशानियों के कारण अधिकांश लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजर अंदाज कर देते हैं. जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक बीमारी अक्सर अंतिम चरण में पहुंच चुकी होती है.
चित्रकूटः आज के दौर में जहां बेहतर इलाज के लिए लोगों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, वहीं चित्रकूट के एक डॉक्टर अपनी सेवा भावना के कारण लोगों के लिए मिसाल बन गए हैं. करीब 17 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे डॉक्टर विभांशु गुप्ता ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय रहते इसकी पहचान कराने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल शुरू की है. वे बिना किसी सरकारी सहायता या आर्थिक सहयोग के गांव-गांव पहुंचकर निशुल्क कैंसर जांच शिविर आयोजित कर रहे हैं.
गांव में लगाते हैं शिविर कैंप
आप को बता दे कि कैंसर का सबसे बड़ा खतरा इसकी देर से पहचान है. आज भी चित्रकूट में ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव और आर्थिक परेशानियों के कारण अधिकांश लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजर अंदाज कर देते हैं. जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक बीमारी अक्सर अंतिम चरण में पहुंच चुकी होती है. ऐसी स्थिति में इलाज कठिन होने के साथ-साथ बेहद महंगा भी हो जाता है और कई मरीजों की जान बचाना संभव नहीं हो पाता है. जिसको सोचते हुए चित्रकूट के डॉक्टर विभांशु गुप्ता ने इस मुहिम की शुरुआत की है. इसी सोच के साथ उन्होंने गांव-गांव जाकर निशुल्क कैंसर जांच अभियान शुरू किया है. शिविरों में आने वाले लोगों की प्रारंभिक जांच की जाती है और यदि किसी व्यक्ति में कैंसर के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए उचित सलाह भी दी जाती है.
ऐसे करें बचाव
वही इस संबंध में डॉ. विभांशु गुप्ता ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है. यदि समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है. तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसी आदतें कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं. इसलिए वे प्रत्येक शिविर में लोगों को इन नशों से दूर रहने, संतुलित भोजन करने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं. बताया कि मैने चिकित्सकीय जीवन में कई ऐसे मरीज देखे हैं, जो कैंसर की अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचते है. उन घटनाओं ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया और तभी से मैने संकल्प लिया कि मैं लोगों को समय रहते जागरूक करेंगे, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सके और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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