खीरे की फसल में झुलसा का अटैक? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, ऐसे करें बचाव

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खीरे की फसल में झुलसा का अटैक? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, ऐसे करें बचाव

Last Updated:May 08, 2026, 12:39 IST

Agriculture Tips for Farmers: गर्मियों में खीरे की खेती करने वाले किसानों के लिए ब्लाइट या चिपचिपा झुलसा रोग एक बड़ी चुनौती बन गया है. तेजी से फैल रही यह बीमारी 40 डिग्री तापमान और अधिक नमी के कारण फसल को तेजी से बर्बाद कर रही है. अगर आपके खीरे की पत्तियों पर पीले-भूरे धब्बे दिख रहे हैं या तने से गोंद जैसा पदार्थ निकल रहा है, तो सावधान हो जाएं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव न करने पर पूरी फसल सूख सकती है. कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के कुशवाहा से जानिए कि कैसे इस गंभीर रोग से फसल को बचाया जा सकता है.

सहारनपुर: यूपी के कई इलाकों में बड़े पैमाने में सब्जी की खेती की जाती है. किसान भाई खीरा, लौकी, तोरई और भिंडी जैसी फसलों से रोजाना अच्छी कमाई भी कर रहे हैं. इन दिनों खेतों में खीरे को फसल लगी हुई है, लेकिन बदलते मौसम के साथ ही खीरे की फसल में ब्लाइट यानी झुलसा रोग नाम की बीमारी ने दस्तक दे दी है. यह एक फफूंदजनित रोग है जो न केवल पौधों को सुखा देता है, बल्कि पैदावार को भी भारी नुकसान पहुंचाता है. कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि लक्षणों को समय रहते पहचान कर समाधान नहीं किया गया, तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है.

क्या हैं लिब ब्लाइट बीमारी के लक्षण?
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. आई.के कुशवाहा ने बताया कि गर्मियों के दौरान खीरे में लिब ब्लाइट का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इसके लक्षणों को पहचानना बेहद आसान है. अगर आप पौधे की पत्ती के निचले हिस्से को देखेंगे, तो वहां छोटे-छोटे रस चूसने वाले कीट नजर आएंगे. ये कीट पत्तों का रस चूसकर वहां जगह-जगह धब्बे छोड़ देते हैं. यदि पत्तियों पर गोलाकार या टेढ़े-मेढ़े धब्बे दिख रहे हैं और पत्तों में छेद हो रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आपकी फसल लिब ब्लाइट की चपेट में है.

बचाव के लिए अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, इस बीमारी पर लगाम लगाने के लिए किसानों को तुरंत कदम उठाने चाहिए. इसके समाधान के लिए ‘इमिडाक्लोप्रिड’ (Imidacloprid) कीटनाशक का छिड़काव करना बेहद प्रभावी रहता है. इसके साथ ही फफूंदी की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कार्बेन्डाजिम 25% और मैनकोज़ेब 50% के मिश्रण की 2 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. इससे बीमारी की रोकथाम निश्चित रूप से संभव है.

तुड़ाई और छिड़काव का सही तालमेल
दवा के छिड़काव के दौरान किसानों को सावधानी बरतनी जरूरी है. डॉ. कुशवाहा ने सलाह दी है कि कीटनाशक छिड़कने के कम से कम 4-5 दिन बाद ही खीरे की तुड़ाई करें. एक बार जब आप फसल की तुड़ाई कर लें, तो उसके बाद दोबारा दवाओं का छिड़काव करें. इससे पौधों का रेस्टिंग पीरियड सही रहता है और अगली बार मिलने वाले फलों की गुणवत्ता भी बनी रहती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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