अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच लपेटे कैसे आए अधिकारी

Last Updated:March 11, 2026, 14:17 IST

Swami Awimukteshwaranand Controversy: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी का विवाद एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. इस बार इसके लपेटे में पुलिस के अधिकारी भी हैं. आशुतोष ब्रह्मचारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर मांग की है कि बरी होने के बाद भी वे इनामी अपराधी कैसे हैं.

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आशुतोष ब्रह्मचारी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद का मामला फिर पहुंचा हाई कोर्ट

प्रयागराज. जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से उन्हें इनामी अपराधी बताने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि बरी होने के बाद भी “इनामी अपराधी” बताने को लेकर याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पुलिस रिकॉर्ड सुधारने का निर्देश देने की मांग की गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल की गई है.

यह याचिका श्री कृष्ण सेना के प्रदेश महामंत्री और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सीताराम यादव, मंत्री विनोद सिंह अधिवक्ता के माध्यम से दाखिल की गई है. याचिका में कहा गया है कि थाना कांधला, जनपद शामली में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पर इनामी घोषित कर दिया गया था. बाद में इस मामले की न्यायिक सुनवाई के उपरांत 30 जुलाई 2024 को एसीजेएम न्यायालय कैराना, जिला शामली द्वारा उन्हें उक्त मुकदमे में सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया. इसके बावजूद संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज भी उन्हें “इनामी अपराधी” के रूप में दर्शाने वाली पोस्ट उपलब्ध है. याचिका में कहा गया है कि जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक छवि को गंभीर क्षति पहुंच रही है.

रिट याचिका में क्या है मांग

रिट याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति के न्यायालय से बरी हो जाने के बाद भी उसका झूठा आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित करना ग़लत है. यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राप्त गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है. याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और सम्मान उसकी मौलिक स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है. और राज्य की एजेंसियों द्वारा गलत अथवा अपुष्ट जानकारी को सार्वजनिक मंच पर प्रसारित करना कानून और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. याचिका में हाईकोर्ट से प्रार्थना की गई है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे तत्काल उक्त पोस्ट को हटाएं डाक्यूमेंट्स में आवश्यक सुधार करें. इसके अलावा बिना सत्यापन किसी भी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर प्रकाशित न करें. साथ ही हाईकोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि इस प्रकार की कार्रवाई से हुई प्रतिष्ठा हानि के संदर्भ में न्यायालय उचित आदेश पारित करें. इस याचिका पर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई हो सकती है.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें

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Location :

Allahabad,Uttar Pradesh

First Published :

March 11, 2026, 14:16 IST

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