इन 5 मंदिरों में छुपा है आशीर्वाद का रहस्य, दर्शन मात्र से पूरी होती हैं इच्छा

Last Updated:March 11, 2026, 16:12 IST

मेरठ में स्थित मां मनसा देवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. पहले इस मंदिर के आसपास श्मशान घाट होने के कारण लोग यहां आने से डरते थे, लेकिन समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था इतनी बढ़ी कि अब यहां बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. खासतौर पर रविवार के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है.

मेरठ के नौचंदी परिसर स्थित मां चंडी देवी मंदिर को हजारों साल पुराना माना जाता है. मंदिर के मुख्य पुजारी पीठाधीश्वर पंडित संजय कुमार शर्मा के अनुसार, मंदोदरी ने यहां मां चंडी देवी की मूर्ति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी. इसका उल्लेख पर्यटन विभाग के दस्तावेजों में भी मिलता है. मान्यता है कि यदि यहां 40 दिनों तक लगातार दीपक जलाया जाए, तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

गोल मंदिर मेरठ के शास्त्री नगर में स्थित मुकुट के आकार में बना यह मंदिर भी सिद्धपीठ मंदिरों की श्रेणी में माना जाता है. यहां मां भगवती आदिशक्ति के रूप में विराजमान हैं. नवरात्रि के दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु विधि-विधान से मां भगवती की पूजा-अर्चना करते नजर आते हैं. मंदिर प्रशासन का दावा है कि परिसर में एक कल्पवृक्ष भी मौजूद है, जिसके पास सच्चे मन से पूजा करने पर मनचाहा वर मिलने की मान्यता है. इसी वजह से यहां रोजाना लाखों श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

अगर आप माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए कटरा नहीं जा पा रहे हैं, तो मेरठ के सदर क्षेत्र में भी श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दर्शन कर सकते हैं. यहां बना मंदिर उसी तर्ज पर तैयार किया गया है, जहां भक्त गुफा मार्ग से होते हुए मां के गर्भगृह तक पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं. इस मंदिर के प्रति भी श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिलती है. खासकर नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.

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मेरठ के सदर स्थित मां काली मंदिर में भी ऐसा ही आस्था का नजारा देखने को मिलता है. करीब 450 साल पुराना यह मंदिर आज भी भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं नवरात्रि के दौरान मां भगवती के दर्शन के लिए भक्तों को घंटों तक लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ता है. मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, रात के समय मंदिर परिसर में कई बार पायल की छम-छम की आवाज भी सुनाई देती है. मान्यता है कि जिस स्थान पर आज मां भगवती विराजमान हैं, वहां पहले एक कुआं हुआ करता था और उसी कुएं के अंदर से मां की मूर्ति प्राप्त हुई थी. बाद में उसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना कर मंदिर का निर्माण किया गया. इसी कारण श्रद्धालुओं की यहां गहरी आस्था देखने को मिलती है.

मां राजराजेश्वरी मंदिर में मां राजराजेश्वरी 64 योगिनियों के साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां विधि-विधान के साथ मां भगवती की पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी राधिका नंद महाराज के अनुसार मां राजराजेश्वरी को दस महाविद्या की देवी भी माना जाता है. ऐसे में जो भी भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी पूजा करता है, उसे मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

मां पीतांबरा देवी मंदिर मेरठ के जागृति विहार में स्थित है, जहां मां पीतांबरा देवी विराजमान हैं. उन्हें दस महाविद्या की महादेवी भी माना जाता है. मान्यता है कि दतिया के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रमुख मंदिर मेरठ में ही स्थित है, जहां भक्त विधि-विधान के साथ मां पीतांबरा देवी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं. मां पीतांबरा देवी को मां बगलामुखी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, मां भगवती उसे राज-पाट, शिक्षा और नौकरी जैसे क्षेत्रों में सफलता का आशीर्वाद देती हैं और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

हस्तिनापुर जो महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है, वहां पांडव टीले पर मां जयंती देवी मंदिर स्थापित है. इस मंदिर में मां काली विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि देशभर से बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

मां मनसा देवी मंदिर के प्रति भी भक्तों में गहरी आस्था देखने को मिलती है. बताया जाता है कि आसपास के कई गांवों के लोग मां मनसा देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं. पहले इस मंदिर के आसपास श्मशान घाट हुआ करता था, जिस कारण लोग यहां आने से भी डरते थे. लेकिन समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था इतनी बढ़ी कि अब यहां बड़ी संख्या में भक्त मां की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. खासतौर पर रविवार के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है.

First Published :

March 11, 2026, 16:12 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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