नई दिल्ली. हॉकी के पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह जिन्होंने भारत के लिए सबसे ज्यादा 412 अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच खेलने वाले दिलीप टिर्की के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 खेलने और बेल्जियम के जॉन जॉन डोमैन के 481 मैचों के विश्व रिकॉर्ड पर नजर रखे हुए हैं. एफआईएच प्रो लीग के यूरोप चरण में नीदरलैंड के खिलाफ पहले मैच के साथ ही मनप्रीत ने टिर्की के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
अब 17 जून को जर्मनी के खिलाफ मैच में मनप्रीत भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे. 33 साल के मनप्रीत ने कहा कि उन्हें अपने सफर की शुरुआत याद आती है जब मीठापुर के एक बच्चे ने भारत के लिए खेलने का सपना देखा था. उन्होंने कहा कि सफर अभी रुका नहीं है और उनकी नजरें विश्व रिकॉर्ड और ओलंपिक 2028 पर हैं, जिसके लिए वह फिटनेस पर खूब मेहनत कर रहे हैं.
वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर
मनप्रीत ने कहा कि वह दुनिया में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना चाहते हैं और डोमैन का रिकॉर्ड तोड़ना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए फिट रहना सबसे जरूरी है. पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने फिटनेस पर काफी ध्यान दिया है और यो यो टेस्ट में सबसे अच्छे नतीजे देने वाले खिलाड़ियों में से हैं. तोक्यो ओलंपिक 2020 में अपनी कप्तानी में भारत को 41 साल बाद ओलंपिक पदक दिलाने वाले मनप्रीत ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है.
विराट कोहली है रोल मॉडल
मनप्रीत ने कहा कि विराट कोहली फिटनेस के मामले में रोलमॉडल हैं और उनसे सीखने को मिलता है कि टॉप लेवल पर खेलने के लिए फिट रहना कितना जरूरी है. मनप्रीत ने कहा कि भारत की जर्सी पहनना उनके लिए गर्व की बात है और वह अगले ओलंपिक तक खेलते रहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती और वह हमेशा गर्व के साथ भारत की जर्सी पहनना चाहते हैं. मनप्रीत ने 412 मैच खेलने को लेकर चल रहे विवादों पर ध्यान नहीं दिया और पूरा फोकस अपनी फिटनेस और खेल पर रखा था. उन्होंने कहा कि कई बार चीजें आपके कंट्रोल में नहीं होती, जिन पर ध्यान देने का कोई फायदा नहीं होता.
परिवार का योगदान
अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस सफर के पीछे परिवार के कई बलिदान थे और उन्हें खुशी है कि वे बेकार नहीं गए. उन्होंने बताया कि वह मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और काफी आर्थिक तंगी देखी है. पिताजी की तबीयत खराब रहती थी और घर में कमाने वाला कोई और नहीं था. बड़े भाई को पढ़ाई छोड़नी पड़ी. परिवार ने हमेशा उनके सपने को जिंदा रखने में मदद की. मनप्रीत ने कहा कि सफलता के सफर में कई लोगों का हाथ रहा है और पत्नी ने भी पूरा साथ दिया.
करियर का खराब दौर
लंदन ओलंपिक 2012 में टीम 12वें स्थान पर रही थी, जो करियर का सबसे खराब दौर था. फिर तोक्यो में 41 साल बाद कांस्य पदक जीतना सबसे बड़ी उपलब्धि रही. प्रो लीग के पहले मैच में भारत को नीदरलैंड ने 3-2 से हराया, लेकिन मनप्रीत को उम्मीद है कि बाकी मैचों और इस साल बड़े टूर्नामेंटों में टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि प्रो लीग हमारे लिए काफी अहम है क्योंकि इसमें इंग्लैंड और पाकिस्तान के साथ खेलना है और ये दोनों टीमें विश्व कप में हमारे पूल में हैं. यहां अच्छा खेलकर आत्मविश्वास लेकर जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि विश्व कप में लंबे समय से हमने पदक नहीं जीता है और एशियाई खेल ओलंपिक क्वालीफायर है. दोनों टूर्नामेंट अहम हैं और उसी को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं.
हॉकी का भविष्य
जूनियर टीमों के अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित मनप्रीत ने कहा कि भारतीय हॉकी सही ट्रैक पर है और ओलंपिक पदक जीतने का सिलसिला जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि पिछले साल अंडर 21 और अब अंडर 18 टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है. जूनियर खिलाड़ी अच्छे आ रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में ओलंपिक पदक जीतने का सिलसिला कायम रहेगा. मनप्रीत, जो पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के प्रशंसक हैं, उनसे काफी कुछ सीखते हैं. उन्होंने कहा कि रोनाल्डो 41 साल की उम्र में भी विश्व कप खेल रहे हैं, जो काफी प्रेरित करते हैं. वह जबरदस्त जुझारू खिलाड़ी हैं और हार नहीं मानते, उनका जज्बा सीखने वाला है. मनप्रीत ने कहा कि वह एक अच्छे टीम प्लेयर के रूप में याद रखा जाना चाहेंगे. आने वाले खिलाड़ी उनसे यही सीखें कि मनप्रीत मैदान पर अपना शत प्रतिशत देता था और मैदान के बाहर भी फोकस रहता था कि कैसे बेहतर खेलना है और हमें भी उसके जैसा ही बनना है.










