सुदर्शन को 22 गज की पट्टी पर मिला ‘ऑक्सीजन’, 4 टेस्ट 7 पारी के बाद आया बेस्ट
Last Updated:October 10, 2025, 15:23 IST
इंग्लैंड और अहमदाबाद में नाकामियों के बाद जब टीम इंडिया दिल्ली में उतरी, तो साईं के लिए यह सिर्फ एक और मैच नहीं था यह था ‘करो या बाहर जाओ’ जैसा मौका और साईं ने इसे बना दिया ‘कर दिखाओ’ वाला मोमेंट.
4 टेस्ट और 7 पारी के बाद साई सुदर्शन के बैट से निकला 87 रनों की पारी
नई दिल्ली. इंग्लैंड की धरती, जहां गेंद हवा में लहराती है और बल्लेबाज़ी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता, वहीं साईं सुदर्शन लगातार नाकाम साबित हो रहे थे. हर पारी में उम्मीदें थी, लेकिन रन बनाने के बजाय वो सिर्फ आलोचनाओं की गिनती बढ़ा रहे थे. टीम मैनेजमेंट की आंखों में सवाल थे, और सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स की लहर. लगने लगा था कि शायद उनका इंटरनेशनल करियर जल्द ही ब्रेक पर चला जाएगा.
लेकिन कहते हैं ना असली हीरा वही जो दबाव में चमके. इंग्लैंड और अहमदाबाद में नाकामियों के बाद जब टीम इंडिया दिल्ली में उतरी, तो साईं के लिए यह सिर्फ एक और मैच नहीं था यह था ‘करो या बाहर जाओ’ जैसा मौका और साईं ने इसे बना दिया ‘कर दिखाओ’ वाला मोमेंट. पहले तो धीमी शुरुआत, लेकिन फिर यशस्वी जायसवाल के साथ मिलकर गढ़ी एक शानदार साझेदारी. दोनों के बीच 193 रनों की पार्टनरशिप ने ना सिर्फ टीम की नींव मजबूत की, बल्कि साईं को खोया हुआ आत्मविश्वास भी लौटाया.
साई के करियर को मिली ‘ऑक्सीजन’
साईं सुदर्शन की ये पारी ना केवल उनकी प्रतिभा की पुष्टि था, बल्कि आलोचकों को करारा जवाब भी. हर चौके-छक्के में उनके चेहरे पर एक अलग ही तेवर था मानो कह रहे हों, अभी खत्म नहीं हुआ हूं मैंउनकी पारी में तकनीक भी दिखी, टेम्परामेंट भी और तेज़ी भी स्पिनरों को पैरों का बढ़िया इस्तेमाल कर खेला, और पेसरों को टाइमिंग से जवाब दिया कुल मिलाकर एक क्लासिक भारतीय बल्लेबाज की पूरी झलक. खासतौर पर बाएं हाथ के स्पिनर्स के खिलाफ उनके बैट से निकले कुछ बैकफुट पंच जो स्पिन के विपरीत खेले गए वो दर्शनीय थे. अपनी 87 रनों की पारी के दौरान सुदर्शन ने 165 गेंदे खेली और 12 चौके लगाए. साई शतक से जरूर चूक गए पर इस पारी उनका आत्मविश्वास जरूर बढ़ा होगा.
वेस्टइंडीज़ के खिलाफ मिली थी नाकामी
इससे पहले जब साईं वेस्टइंडीज़ के खिलाफ पहले टेस्ट में जो मौका मिला था, तो वो कुछ खास नहीं कर पाए . अहमदाबाद की की आसान पिचों पर भी उनका बल्ला खामोश रहा, जिससे कई पूर्व क्रिकेटर्स ने उनके चयन पर भी सवाल उठा दिए थे लेकिन शायद वही नाकामी उनके लिए सबसे बड़ा सबक बन गई. इस एक पारी ने न सिर्फ साईं का आत्मविश्वास लौटाया है, बल्कि उन्हें टीम इंडिया के लिए एक सॉलिड ऑप्शन के तौर पर फिर से खड़ा कर दिया है. अब चयनकर्ता भी उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते, और कप्तान को भी भरोसेमंद विकल्प मिल गया है.
News18 न्यूजलेटर
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First Published :
October 10, 2025, 15:23 IST











