सरसों की कटाई के बाद बचा कूड़ा, खेतों के लिए है खजाना, मिट्टी को बना देगा ताकतवर

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सरसों की कटाई के बाद बचा कूड़ा, खेतों के लिए है खजाना, मिट्टी को देगा ताकत

Last Updated:March 11, 2026, 16:17 IST

Improve Soil Fertility from Mustard Straw: क्या आप जानते हैं कि सरसों की कटाई के बाद खेत में बचने वाली तूड़ी (अवशेष) जिसे आप कौड़ियों के दाम बेच देते हैं या थ्रेसिंग के बदले मशीन वाले को दे देते हैं, वह असल में आपके खेत के लिए ‘नेचुरल पेस्टिसाइड’ और खाद का खजाना है. शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. विमल कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि सरसों के अवशेषों को खेत से बाहर निकालना मिट्टी की उर्वरता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. क्योंकि, सरसों की तूड़ी में कुछ ऐसे रसायन मौजूद होते हैं जो जमीन के अंदर बैठे कीटों का खात्मा कर सकते हैं और आपकी सिंचाई की लागत को घटा सकते हैं.

शाहजहांपुर: सरसों की फसल की कटाई के साथ ही किसानों के सामने अवशेष का बेहतर प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाती है. शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सरसों की ‘तूड़ी’ (अवशेष) को बेचने या जलाने के बजाय खेत में ही मिलाने की सलाह दी है. यह छोटी सी सावधानी न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाती है, बल्कि आने वाली फसल में कीटों के प्रकोप को भी कम करती है. अक्सर किसान केवल थ्रेसिंग मशीन के किराए की बचत के लालच में किराए के बदले तूड़ी मशीन वाले को ही दे देते है, या जल्दबाजी में जला देते हैं, जो भविष्य में मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए बड़ा नुकसान साबित होता है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. विमल कुमार ने बताया कि वर्तमान में सरसों की फसल कट रही है और कटाई के बाद बचने वाले अवशेष को किसान अक्सर बेच देते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करना भूमि की उपजाऊ क्षमता के साथ खिलवाड़ है. सरसों की तूड़ी में खास प्राकृतिक रसायन होते हैं, जो जमीन के अंदर मौजूद हानिकारक कीटों के अंडों और लार्वा को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. जब किसान इन अवशेषों को मिट्टी में मिला देते हैं, तो यह कीटों के जीवन चक्र को तोड़ देता है, जिससे अगली फसल में कीटनाशकों की जरूरत कम हो जाती है. इसके अलावा, यह मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने का सबसे सरल और सस्ता तरीका है.

बढ़ती है मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता
सरसों के अवशेषों को खेत में जुताई के साथ मिलाने से मिट्टी में ‘ऑर्गेनिक मैटर’ यानी जैविक पदार्थों की मात्रा तेजी से बढ़ती है. जब मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ते हैं, तो उसकी जल धारण क्षमता में भी सुधार होता है. इससे अगली फसल के दौरान सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और फसल को प्रतिकूल मौसम में भी नमी मिलती रहती है. अगर ऐसा कई बार किया जाए तो बंजर हो रही जमीन को उर्वरा से भरपूर किया जा सकता है.

हानिकारक कीटों को भी करती है कंट्रोल
मिट्टी में मौजूद ‘ग्रब’ और अन्य कीट फसल की जड़ों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. सरसों के अवशेषों में मौजूद केमिकल तत्वों के प्रभाव से इन कीटों का लार्वा अंडे से बाहर निकल आता है और भोजन न मिल पाने के कारण भूख से मर जाता है. यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है, जिससे किसानों को महंगी रासायनिक दवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. यह पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को संतुलित रखने में भी मदद करता है.

सरसों के अवशेषों को खाद के रूप में उपयोग करने से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है. मिट्टी की संरचना में सुधार होने से पौधों का विकास बेहतर होता है, जिससे उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Location :

Shahjahanpur,Uttar Pradesh

First Published :

March 11, 2026, 16:17 IST

Source

dainikupeditor@gmail.com

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