खेती में बढ़ानी है पैदावार, तो फसल बोने से पहले कराएं ये जरूरी जांच

गाजीपुर: खेती में अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ बीज और सिंचाई ही नहीं, बल्कि मिट्टी की सही सेहत भी उतनी ही जरूरी होती है. भारत सरकार भी किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता समझने के लिए Soil Health Card Scheme के तहत सॉयल टेस्टिंग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसी संदर्भ में गाजीपुर में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल बोने से पहले मिट्टी की जांच कराना किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

गाजीपुर में कृषि से जुड़े विशेषज्ञ डॉ अशोक कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, बताते हैं कि मिट्टी की जांच कराने से खेत में मौजूद प्रमुख पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) की मात्रा का सही पता चल जाता है. इससे किसान यह तय कर सकता है कि उसे किस खाद या उर्वरक की कितनी मात्रा देनी है.

उनका कहना है कि अक्सर किसान बिना जांच के ही अधिक मात्रा में उर्वरक डाल देते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. यदि सॉयल टेस्टिंग कराकर ही उर्वरकों का उपयोग किया जाए, तो खेती की लागत कम हो सकती है और उत्पादन भी बेहतर हो सकता है.

कैसे लें मिट्टी का सैंपल

अशोक कुमार बताते हैं कि मिट्टी का सैंपल लेने के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती. किसान खुद भी अपने खेत से सैंपल ले सकते हैं. इसके लिए खेत में मेड़, नाली या गड्ढे वाले हिस्से को छोड़कर अलग-अलग स्थानों से मिट्टी लेनी चाहिए. आमतौर पर खेत के 4-5 स्थानों से 15-20 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी निकालकर उसे अच्छी तरह मिला दिया जाता है. इसके बाद लगभग 500 ग्राम मिट्टी को जांच के लिए सैंपल के रूप में रखा जाता है.

सैंपल को साफ पॉलिथीन या थैली में रखकर उस पर खेत का नाम, स्थान और फसल का विवरण लिखकर जांच के लिए भेजा जा सकता है.

कहां कराएं मिट्टी की जांच

गाजीपुर जिले में किसानों के लिए कृषि विज्ञान के केंद्र में मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध है. यहां किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर यह जान सकते हैं कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किस प्रकार की खाद की जरूरत है.

किसानों को क्या होगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराते हैं, तो उन्हें तीन बड़े फायदे मिलते हैं

फसल की पैदावार बेहतर होती है, उर्वरकों का सही और सीमित उपयोग होता है, खेती की लागत कम होती है. इस तरह सॉयल टेस्टिंग किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने में मदद करती है और उनकी आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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