उधार का बल्ला, लड़कों संग ट्रेनिंग, कौन हैं ऋचा, जिसने WC में रचा इतिहास
Last Updated:October 10, 2025, 11:42 IST
Richa Ghosh Struggle Story: ऋचा घोष शुरुआत में लड़कों के साथ क्रिकेट की ट्रेनिंग करती थीं. उनके आदर्श महेंद्र सिंह धोनी हैं. वह धोनी की तरह विकेटकीपर बनना चाहती थीं. रिचा के पिता क्लब क्रिकेट खेलते थे. बेटी को क्रिकेटर बनाने के लिए रिचा के पिता मानवेंद्र घोष ने बिटिया को क्रिकेटर बनाने के लिए कुछ समय के लिए अपना बिजनेस छोड़ दिया था.
ऋचा घोष लड़कों के साथ ट्रेनिंग करती थीं.
नई दिल्ली. ऋचा घोष भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अहम खिलाड़ी हैं. घोष विकेटकीपर के साथ साथ हार्ड हिटर बल्लेबाज भी हैं. जो अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से मैच का रुख बदलने का माद्दा रखती हैं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महिला वनडे विश्व कप मुकाबले में ऋचा ने ताबड़तोड़ 94 रन की पारी खेलकर अपना नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज करा लिया है. ऋचा ने वर्ल्ड कप में आठवें नंबर पर उतरकर सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में जन्मी ऋचा घोष को टीम इंडिया तक का सफर तय करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. 18 साल की उम्र में ही ऋचा को पहली बार वनडे विश्व कप टीम में जगह मिली थी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
ऋचा घोष (Richa Ghosh) के पिता मानवेंद्र घोष (Manabendra Ghosh) एक क्लब क्रिकेटर और कोच थे.पिता ने ही ऋचा घोष को क्रिकेट से अवगत कराया. ऋचा घोष जहां रहती थीं वहां पर महिला क्रिकेट को लेकर ज्यादा क्रेज नहीं था.उनकी शुरुआती ट्रेनिंग लड़कों के साथ हुई है.लड़कों के साथ खेलकर ऋचा घोष ने गेंद की गति, उछाल और विषम परिस्थितियों में भी नहीं घबराने की कला सीखी.ऋचा घोष लड़कों की तरह ही बल्लेबाजी करती हैं. पिता ने ऋचा को उधार का बल्ला भी दिलाया जिससे उन्होंने क्रिकेट के गुर सीखे.
ऋचा घोष लड़कों के साथ ट्रेनिंग करती थीं.
क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलते थे ऋचा घोष के पिता
ऋचा घोष के पिता ने दो साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि वह भी क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलते थे. उन्होंने कहा था कि जब वो क्लब में प्रैक्टिस के लिए जाते थे, तब ऋचा भी उनके साथ जाती थीं. उस क्लब में लोग अपने बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाने के लिए आते थे. ऋचा भी धीरे धीरे उन बच्चों के साथ वहां खेलने लगीं. मानवेंद्र घोष का कहना था कि वह ऋचा को टेबल टेनिस खिलाड़ी बनाना चाहते थे. ऋचा जिस शहर मे रहती थीं वहां लड़कियों के लिए क्रिकेट की अकादमी नहीं थी. इसलिए उन्होंने बिटिया का एडमिशन टेबल टेनिस अकादमी में करवा दिया. जहां पर ऋचा का मन नहीं लगता था.
पिता ऋचा घोष को टेबल टेनिस प्लेयर बनाना चाहते थे
ऋचा घोष ने कुछ दिन बाद अपने पिता से कहा कि वह क्रिकेट खेलना चाहती हैं.फिर पिता उन्हें कुछ दिन क्लब में लेकर गए. लेकिन जब ऋचा ने अपने पिता से कहा कि वह क्रिकेट में भी आगे बढ़ना चाहती हैं तो पिता ने उन्हें कोलकाता ले जाकर ट्रेनिंग दिलाने का फैसला लिया. मानवेंद्र ने कहा कि कोलकाता में लड़कों के साथ लड़कियां ट्रेनिंग करती थीं. बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के कैंप में ऋचा भी कैंप में रहने लगी.लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर मानवेंद्र चिंतित थे. इसलिए उन्होंने कुछ समय के लिए अपना बिजनेस छोड़ दिया था और बेटी के साथ ही कोलकाता में रहने लगे थे. ऋचा के पिता ने बाद में कोलकाता में ही पार्ट टाइम अंपायरिंग का काम भी शुरू कर दिया था. जब ऋचा का टीम इंडिया में सेलेक्शन हुआ, उसके बाद पिता फिर अपने पुराने कारोबार में लौट गए.
16 साल की उम्र में ऋचा घोष ने भारत के लिए डेब्यू किया
ऋचा घोष ने 16 साल की उम्र में भारतीय टी20 टीम में डेब्यू किया. उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई सीरीज में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला.उस समय वह 16 साल और 4 महीने की थीं.उसी वर्ष उन्होंने आईसीसी टी20 विश्व कप 2020 में भी खेला, जिसमें भारत उपविजेता रहा. हालांकि उन्हें ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन बेंच पर उनके संयम ने टीम प्रबंधन को प्रभावित किया. ऋचा घोष अभी सिर्फ 22 साल की हैं.उनके लिए यह साल सर्वश्रेष्ठ वर्ष की तरह रहा है. क्योंकि ऋचा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 94 रन बनाकर एकदिवसीय विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली नंबर आठ बल्लेबाज के रूप में एक नया रिकॉर्ड भी बना डाला.उन्होंने इस मैच में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए.
About the Author
Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर
करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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First Published :
October 10, 2025, 11:40 IST










