Last Updated:October 04, 2025, 04:05 IST
Tere Ishk Mein के टीजर में रांझणा फिल्म का कुंदन अब शंकर बनकर तांडव करता नजर आ रहा है. धनुष और कृति सेनन लव, ट्रेजडी और इश्क की कहानी में बॉलीवुड को झटका देने आ रहे हैं एक साथ.
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Tere Ishk Mein. गली-गली खबर उड़ गई. कानों में खटक गई. आंखें फटी की फटी रह गईं. हलक सूख गया. दिल की धड़कन तेज हो गई. वजह सिर्फ एक. कुंदन खूंखार हो गया. हां, वही कुंदन. अब नाम नया. रूप नया. शंकर. मानो मिर्जापुर वाले गुड्डू भइया की तरह नगाड़ा पीट दिया हो. ऐलान कर दिया हो- अब हम वो कुंदन नहीं रहे जो लिबिर-लिबिर करता था. अब हम शंकर हैं. और शंकर तांडव करेगा. जरा भी जज्बातों से खेला, तो खून-पसीना एक कर देगा.
नगाड़ा बजना बाकी था. आंगन में धीमेी आवाज में कोई वाद्य बज रहा. लग रहा शादी का माहौल है. तभी अचानक सन्नाटा. पूरा माहौल शांत. और उसी खामोशी को चीरते हुए एंट्री मारता है कुंदन. जो अब शंकर है. कदम छोटे, आंखें बड़ी. और सामने बैठी है मुक्ति बनी कृति सेनन. उसकी आंखें ठहर गईं. भौंहें जम गईं. तभी आवाज गूंजी- “अपने बाप को जलाने गया था बनारस. सोचा तेरे लिए गंगाजल लेता आऊं.” और फिर वही पंचलाइन. वही लाइन, जो हर धोखा खाए आशिक का डायलॉग बनने वाली है- “नई जिंदगी शुरू कर रही है. पुराने पाप तो धो ले.”
टीजर का मिजाज ही बता रहा है. ये कोई आम फिल्म नहीं. ये खेल है. जिसमें जनता तय नहीं कर पाएगी कि सही कौन और गलत कौन. एक तरफ कृति खुद को आग में झोंक रही. दूसरी तरफ धनुष दुनिया जलाने पर आमादा. बॉलीवुड के लिए ये झटका है. क्योंकि अब तक आदत थी- ट्रेजडी से लव स्टोरी बनाना. लेकिन इस बार लव स्टोरी को ट्रेजडी में बदलने का टाइम है.
आनंद एल रॉय के पास कमांड है. कहानी को फ्लैशबैक में धकेलने की ताकत है. और धनुष… ओह भाई. एक्टर नहीं. झटका है. इस बार वो रांझणा वाला भोला कुंदन नहीं. ये शंकर है. खून-खराबा वाला शंकर. आंखों में गुस्सा. डायलॉग में आग. टीजर ने सबको झटका दिया. खासकर उस सीन पर. जहां धनुष, कृति से आंख में आंख डालकर कहता है- “शंकर करे तेरे बेटा हो… तुझे भी पता चले इश्क में जो मर जाते हैं वो भी किसी के बेटे होते हैं” भाई, ये लाइन सुनकर तो अंगूठा मुंह में चला जाए. बस इतना सुनकर ही लोग समझ गए. फिल्म का एंड कैसा होगा.
अब सोचो, जिन लोगों ने “सैयारा” सुनकर रो-रोकर आंखें लाल कर ली थीं. उनके साथ क्या होगा? मोहित सूरी के रोमांस से आंसू बह निकले थे. अब आनंद एल रॉय दिल का पत्थर बनाने आ रहे हैं. आंखें जलाने आ रहे हैं. दो मिनट का टीजर ही इतना भारी है कि लोग हिल गए. बीच में अरिजीत की आवाज आकर हिलोर देती है. नवंबर की ठंड में ये फिल्म थिएटर में देखी. तो दिल पत्थर हो जाएगा. यकीन मानो.
और हां. ये फिल्म देखने के लिए लौंडों का मेला लगेगा. सिंगल लौंडो की बारात निकलने वाली है. थिएटर में भीड़. और बाहर रील्स का बाढ़. खासकर वो डायलॉग. जिस सीरियसनेस से धनुष ने बोला है. उसी पर लाखों वीडियो बनेंगे. आखिर में साफ है. टीजर में प्यार से ज्यादा दोनों के बीच नफरत झलक रही. यही फिल्म में भी होने वाला है. दो मिनट के टीजर में ही तबाही दिख रही. तीन घंटे की फिल्म में क्या होगा, सोचकर ही माथा चकरा रहा.
एक बात पक्की. इस बार थिएटर नहीं, दिल फटेगा.
डिस्कलेमर: ये ऑथर के व्यक्तिगत विचार हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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Location :
Lucknow,Uttar Pradesh
First Published :
October 04, 2025, 04:02 IST











