पशुओं का बढ़ाना है दूध या चाहिए फौलादी ताकत? इस पौधे की जड़ जादुई, जानिए
Last Updated:October 20, 2026, 17:51 IST
Shatavari Benefits : क्या आपका पशु भी अपनी क्षमता के हिसाब से कम दूध देने लगा है और आप सारे नुस्खे अपनाकर थक चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिल रहा. पशु चिकित्सक भी हाथ खड़े कर चुके हैं. डाइट भी अच्छी है, लेकिन उसका फायदा आपको मिल्क प्रोडक्शन में नहीं मिल रहा. घबराने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको ऐसी चीज बताएंगे, जिसे खिलाते ही पशु दूध की नदियां बहाने लगेंगे. आयुष चिकित्सा में शतावर का प्रयोग हमेशा से होता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका प्रयोग डेयरी फार्मिंग में भी किया जा सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में मिर्जापुर के कृषि एक्सपर्ट योगेंद्र कुमार सिंह से बात की.
मिर्जापुर. आयुष चिकित्सा में शतावर का प्रयोग हमेशा से होता आया है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में इसकी बहुयायत मात्रा में खेती की जा रही है. शतावर के फायदे जानकर आप भी चौंक जाएंगे. ये काफी महंगी बिकने वाली औषधि है. पशुओं और इंसानों को इससे कई फायदे मिलते हैं. इसके सेवन से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है. पाचन सहित दूसरे शारीरिक सेल भी सक्रिय होते हैं. अगर आप भी फुर्तीला रहना चाहते हैं और फौलादी ताकत चाहते हैं तो शतावर का सेवन कर सकते हैं. लोकल 18 से मिर्जापुर के कृषि एक्सपर्ट योगेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि शतावर के कई फायदे हैं. इसके सेवन से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है. पाचन क्रिया ठीक रहती है, जिससे खाना आसानी के साथ डाइजेस्ट हो जाता है.
योगेंद्र कुमार बताते हैं कि स्तनपान करने वाली महिलाओं को यह विशेष लाभ पहुंचता है. अगर आपको तनाव है या सामान्य कमजोरी है तो भी यह औषधि रामबाण साबित हो सकती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. हालांकि, सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.
पशुओं को खिलाते समय रखें इस बात का ध्यान
योगेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि शतावर के पौधे की जड़ पशुओं के लिए उत्तम मानी जाती है. इसके जड़ को पशुओं को खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ता है. जो भी किसान डेयरी का बिजनेस करते हैं या फिर उनके पशु क्षमता के अनुसार दूध न दे रहे हों, तो वे शतावर के पौधे की जड़ों को अपने पशुओं को खिलाएं. हालांकि, इसका उपयोग हर पशुओं के लिए अलग-अलग होता है. गाय, भैंस और बकरी को उनके वजन के हिसाब से शतावर दिया जाता है. अगर आप भी पशुओं को शतावर के जड़ों को खिलाना चाहते हैं तो एक बार पशु चिकित्सक से सलाह जरूर ले लें. इसके बाद ही इसे पशुओं को खिलाएं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Mirzapur,Uttar Pradesh
First Published :
October 20, 2026, 17:51 IST










