उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बाघ और बाघिनों की लगातार हो रही मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुधवा टाइगर रिजर्व समेत जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों के दौरान कई बाघों की मौत दर्ज की गई है, जिससे वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है.
दुधवा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर आवासों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में बाघ संरक्षित हैं इसके बावजूद लगातार सामने आ रही मौतों ने संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं कई मामलों में मौत के कारणों की जांच जारी है, जबकि कुछ मामलों में बीमारी,आपसी संघर्ष अन्य कारणों की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि अंतिम कारण पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
बाघिन की मौत के मामले की एसआईटी करेगी जांच
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघिन की मौत की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है. एनटीसीए ने भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. बाघिन को 23 जून को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया था. इसके बाद उसकी मौत हो गई थी बरेली के आईवीआरआई की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बाघिन की आंतों और पेट में जख्म तथा पेट में कीड़े मिलने का उल्लेख है. हालांकि, बिसरा जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है.
कब और कैसे हुई मौतें
मैलानी रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर रेलवे लाइन के किनारे बाघिन का एक अप्रैल को बरामद हुआ था. अधिकारियों का कहना था की ट्रेन की टक्कर से बाघिन की मौत हुई थी. बीते 5 मई को मझगई रेंज के नौनिया बीट में आपसी संघर्ष के कारण करीब 5 वर्षीय बाघिन की जान चली गई थी.
23 जून को मझगई रेंज में रेस्क्यू के दौरान पिंजरे में कैद 4 वर्षीय बाघिन की मौत हो गई थी, जिससे बाद इस मामले में शासन ने एसआईटी टीम का गठन कर दिया है.
29 जून को दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज के महेशपुर जंगल में सोमवार शाम गश्त कर रहे वन कर्मियों की टीम को उदयपुर गांव के पास सड़क पर घायल अवस्था में बाघ बैठा दिखाई दिया था. उसके आगे के दोनों पैर और कंधे पर गहरे जख्म थे. उसके बाद बाघ की मौत हो गई थी.
वन्य जीव विशेषज्ञो का मानना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं बाघों की सुरक्षा उनके आवास और मानव गतिविधियों के बढ़ते दबाव की ओर संकेत करती हैं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
लगातार हो रही बाघों व बाघिनों की मौत के मामले में न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत करते हुए मुख्य वन संरक्षक एवं दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ एच राजा मोहन ने बातचीत करते हुए बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले तीन महीने में बाघिन की मौत हुई है. वहीं एक बाघ की मौत दक्षिण खीरी वन प्रभाग क्षेत्र में हुई है, आपसी संघर्ष जंगल से गुजर रही रेलवे लाइन की चपेट में आने से मौत हुई थी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा.










