गोवर्धन पर्वत और हनुमान जी की अनसुनी कहानी, हर भक्त को जाननी चाहिए

Last Updated:July 02, 2026, 06:50 IST

गोवर्धन पर्वत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमान जी इसे रामसेतु निर्माण के लिए लंका ले जाना चाहते थे. भगवान राम के वचन और द्वापर युग में श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पूजा से जुड़ी यह मान्यता आज भी ब्रज में श्रद्धा के साथ सुनाई जाती है.

मथुरा: यूपी का मथुरा एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां आपको हर युग की दास्तां सुनने को मिलेगी. बृज में किसी ना किसी रूप में भगवान ने जन्म लिया और लीलाओं को किया. बृज हर युग की लीलाओं के लिए भी जाना जाता है. द्वापर में कृष्ण ने पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठाया और इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाया. इस पर्वत का एक किस्सा भगवान राम से जुडा है. चलिए उस किस्से के बारे में जानते हैं.

हनुमान जी ने हाथ जोड़ कर गिर्राज पर्वत को पूरी कथा सुनाई 

भगवान धरती पर समय-समय पर अवतार लेटे हैं. अवतार लेने के साथ वह अपनी लीलाएं करते हैं. द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी लीलाओं को ब्रज में किया. यहां ब्रज में कई किस्से कहानी आपको कृष्ण की लीलाओं के देखने और सुनने को मिलेंगे. श्री कृष्ण ने एक लीला को गोवर्धन में भी किया, जहां इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों को गोवर्धन पर्वत उठाकर बचाया था. गोवर्धन पर्वत से एक किस्सा भगवान राम का भी जुड़ा हुआ है.

इस पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान राम के अनन्य शिष्य कहे जाने वाले हनुमान जी इस पर्वत पर आए थे. लोकल 18 की टीम निकल पड़ी गोवर्धन पर्वत के लिए और यहां उन्होंने हनुमान जी से जुड़े हुए किस्से और कहानियों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया. जानकारी जुटाना के साथ हमारी टीम की मुलाकात गोवर्धन दानघाटी मंदिर के पुजारी हर्षवर्धन कौशिक से हुई लोकल 18 की टीम ने हर्षवर्धन कौशिक से गोवर्धन पर्वत की पौराणिक मान्यता और हनुमान जी से जुड़े हुए क्या रहस्याओं को लेकर बातचीत की. लोकल 18 की टीम को हर्षवर्धन कौशिक ने हनुमान जी से जुड़े हुए कहानी और रहस्यों के बारे में बताया.

द्वापर में भगवान राम ने लिया था, कृष्ण का अवतार

लोकल 18 की टीम से बातचीत के दौरान हर्षवर्धन कौशिक ने बताया कि जब भगवान राम द्वारा लंका पर चढाई के लिए बाधा बने समुद्र पर सेतु बनाने के लिए पेड़, पत्थर, और पहाडों कि आवस्यकता हुई, तो भगवान राम ने अपनी सेना को आदेश दिया. सभी दिशाओं में जाकर पर्वत आदि लेकर आएं. भगवान के आदेश पर सभी वानर चल दिए. उन बनारो के साथ हनुमान जी भी पर्वतो कि खोज में निकल पड़े. जब वह गोवर्धन आये, तो उन्होंने गोवर्धन पर्वत को देखा. उन्हें उठाने कि कोशिश की. इस पर गोवर्धन पर्वत ने पूछा कि आप कौन हैं. मुझे क्यों उठाना चाहते हैं.

हनुमान जी ने हाथ जोड़ कर गिर्राज पर्वत को पूरी कथा सुनाई. कहा कि मैं आपको भगवान राम की सेवा और उनके दर्शन हेतु ले जा रह हूँ. यह सुन गोवर्धन पर्वत ने अपना भार हल्का कर लिया. लेकिन जैसे ही हनुमान जी गिर्राज पर्वत को लेकर चलने लगे. उन्हें सूचना मिली कि सेतु निर्माण पूरा हो चूका है. उन्होंने गिर्राज पर्वत को उसी स्थान पर रख दिया. इस पर गिर्राज पर्वत ने हनुमान जी से पूछा कि आप तो मुझे भगवान कि दर्शन हेतु ले जा रहे थे. मुझे अपने साथ लेकर चलिए, यदि आप ने मुझे भगवान के दर्शन नहीं कराये तो आपको मिथ्या बादी होने का श्राप लगेगा. इस पर हनुमान जी ने भगवान का ध्यान किया. भगवान मुझे इस श्राप से बचाए, तो भगवान राम ने उनसे कहा की आप चिंता न करें. मैं जब द्वापर में अवतार लूँगा. तब में स्वयं गिर्राज पर्वत की पूजा करूँगा. गिर्राज महाराज का दर्शन दूंगा.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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Mathura,Mathura,Uttar Pradesh

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