उद्धव ठाकरे को लग सकता है बड़ा झटका, शिवसेना के 6-7 सांसद थाम सकते हैं शिंदे गुट का हाथ, संजय राउत ने दिल्ली में संभाला मोर्चा

Maharashtra News: शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस (19 जून) से ठीक पहले महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट के 6 से 7 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिंदे गुट इस मौके का फायदा उठाकर उद्धव ठाकरे के सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटा हुआ है। दिल्ली में उद्धव गुट के सांसद सक्रिय हैं, जो ऑपरेशन टाइगर के डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ सांसद अनिल देसाई और संजय राउत वर्तमान में दिल्ली में मौजूद हैं। दोनों सांसद पार्टी में किसी भी तरह की टूट या सांसदों के शिफ्ट होने को रोकने के लिए लगातार संपर्क में हैं। उद्धव गुट के ही एक अन्य सांसद संजय देशमुख भी दिल्ली में हैं।

अरविंद सावंत और राजा भाऊ भी पहुंचेंगे दिल्ली

इस बीच, उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत और नासिक से सांसद राजा भाऊ वाजे भी जल्द ही दिल्ली पहुंचने वाले हैं। दोनों सांसदों के दिल्ली जाने का मुख्य उद्देश्य उद्योग विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होना बताया जा रहा है। साथ ही, सूत्रों का कहना है कि वे ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत संभावित नुकसान को नियंत्रित करने और सांसदों को पार्टी में बनाए रखने की कोशिश भी करेंगे।

राजनीतिक माहौल गरम

शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले सांसदों के संभावित शिफ्ट की ये खबरें राजनीतिक गलियारों में तेजी से फैल रही हैं। उद्धव ठाकरे गुट जहां पार्टी की एकता बनाए रखने के लिए सक्रिय है, वहीं शिंदे गुट की ओर से बड़े स्तर पर सांसदों को आकर्षित करने की कोशिशें जारी हैं।

हालांकि, अभी तक किसी भी सांसद ने आधिकारिक तौर पर बयान नहीं दिया है, लेकिन दिल्ली में दोनों गुटों के सांसदों की मौजूदगी से साफ है कि राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है?

शिंदे गुट के विधायक कृपाल तुमाने ने 16 जून को खुलकर दावा किया कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत उद्धव ठाकरे गुट के 7 सांसद शिंदे गुट में शामिल होने की अंतिम चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि 16 विधायक भी संपर्क में हैं। यह बदलाव संसद के मानसून सत्र से पहले होने की संभावना जताई गई है।

शिंदे गुट का पक्ष 2022 की तरह एक बार फिर बड़े पैमाने पर सांसदों और विधायकों को लुभाने की कोशिश में लगा है। इससे लोकसभा में NDA की ताकत बढ़ेगी और उद्धव गुट कमजोर होगा। स्थापना दिवस से पहले यह बड़ा झटका माना जा रहा है।

उद्धव गुट की जवाबी कार्रवाई

उद्धव ठाकरे गुट ने इस अटकलों को खारिज करते हुए एकता दिखाने की कोशिश की थी। 14 जून को उद्धव ठाकरे ने अपने गुट के सभी 9 लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। इस बैठक में चार सांसद व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे, बाकी सांसद वर्चुअल या फोन पर शामिल हुए।

2022 की फूट और दो शिवसेनाएं

शिवसेना की स्थापना बाल ठाकरे ने 19 जून, 1966 को की थी। 2022 में पार्टी में भारी फूट पड़ गई। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बहुमत विधायक और सांसद अलग हो गए। शिंदे गुट ने BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई और आधिकारिक शिवसेना का नाम व तीर-कमान प्रतीक हासिल कर लिया।

उद्धव ठाकरे के गुट को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) या शिवसेना यूबीटी कहा जाता है, जिसका प्रतीक मशाल है। दोनों गुट एक-दूसरे पर “असली शिवसेना” होने का दावा करते हैं और अलग-अलग स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

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