Last Updated:October 13, 2025, 11:09 IST
John Campbell’s Vitiligo Disease: वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के बल्लेबाज जॉन कैंपबेल स्किन की बीमारी विटिलिगो (Vitiligo) से जूझ रहे हैं. यह बीमारी खतरनाक नहीं होती है, लेकिन इसकी वजह से स्किन पर सफेद धब्बे होने लगते हैं. यह ऑटो इम्यून बीमारी है, जिसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है. प्रॉपर ट्रीटमेंट से इस बीमारी से कुछ हद तक राहत मिल सकती है.
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वेस्टइंडीज के बल्लेबाज जॉन कैंपबेल विटिलिगो से जूझ रहे हैं.All About Vitiligo Disease: भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस वक्त दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में टेस्ट मैच खेला जा रहा है. इस मुकाबले की दूसरी पारी में वेस्टइंडीज के बल्लेबाज जॉन कैंपबेल (John Campbell) ने छक्का लगाकर शतक पूरा किया. जब वह शतक का सेलिब्रेशन कर रहे थे, तब उनकी दोनों कोहनी पर सफेद दाग दिखाई दे रहे थे. बल्लेबाजी के दौरान उनके होंठ पर भी सफेद दाग दिखे. इसके बाद कई फैंस यह अंदाजा लगाने लगे कि यह स्किन की कोई बीमारी हो सकती है. जब इंटरनेट पर इस बारे में सर्च किया, तो पता चला कि कैंपबेल विटिलिगो (Vitiligo) से जूझ रहे हैं, जो स्किन से जुड़ी एक बीमारी है. इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं है और इसकी वजह से लोगों की जिंदगी काफी मुश्किल हो जाती है.
यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि विटिलिगो एक बीमारी है, जिसकी वजह से लोगों के शरीर के कुछ हिस्सों पर सफेद धब्बे नजर आने लगते हैं. ये पैचेस बन जाते हैं और धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं. कई बार ये होंठ से शुरू होते हैं और हाथ-पैरों पर फैल जाते हैं. कोहनी पर भी अक्सर विटिलिगो के धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इस बीमारी की वजह से स्किन को नेचुरल कलर देने वाले पिगमेंट मेलेनिन का प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित होता है. यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर 20 से 30 साल की उम्र के बीच शुरू होती है. विटिलिगो से स्किन के अलावा आंखों, बालों और मुंह के अंदर भी सफेद धब्बे हो सकते हैं.
डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया कि विटिलिगो एक क्रोनिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही सेल्स पर अटैक करने लगता है. इसकी वजह से स्किन को रंगत देने वाला पिगमेंट सही तरीके से काम नहीं करता है और स्किन पर जगह जगह सफेद धब्बे नजर आने लगते हैं. जेनेटिक फैक्टर्स विटिलिगो का खतरा बढ़ा देते हैं. अगर किसी शख्स की फैमिली में किसी को विटिलिगो या ऑटोइम्यून बीमारियां हैं, तो उसे भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा हो सकता है. तनाव, स्किन इंजरी और सूरज की ज्यादा धूप भी विटिलिगो के डेवलप होने का कारण बन सकती है. विटिलिगो का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, लेकिन कुछ क्रीम से राहत मिल सकती है. एक बार यह बीमारी हो जाए, तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता है.
एक्सपर्ट की मानें तो विटिलिगो खतरनाक बीमारी नहीं है, लेकिन इसकी वजह से सफेद धब्बे हो जाते हैं और इससे लोग मेंटली परेशान हो जाते हैं. इससे लोगों का सेल्फ-कॉन्फिडेंस कम हो जाता है और उनकी सोशल लाइफ भी बुरी तरह प्रभावित होती है. कई बार इसे छुआछूत की बीमारी भी समझा जाता है, लेकिन यह संक्रामक बीमारी नहीं होती है. विटिलिगो से पीड़ित लोगों के लिए जिंदगी मुश्किल हो जाती है, लेकिन कई लोग इसकी परवाह किए बगैर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते हैं. अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी की शुरुआत में ही प्रॉपर ट्रीटमेंट लेना शुरू कर दे, तो इसे कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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First Published :
October 13, 2025, 11:00 IST










