Raghav Chadha Joins BJP: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इससे दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हलचल मच हुई है। इसी बीच बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने भी चुटकी लेते हुए अरविंद केजरीवाल को एक खास सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि, मैं अरविंद केजरीवाल से ये कहना चाहूंगा कि आप भगवंत मान को पकड़कर रखिएगा कि कब वे सारे विधायक लेकर फुर्र हो जाएं।
वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिक्रिया की बात की जाय तो राघव समेत सांसदों के आम आदमी पार्टी छोड़ने की उन्होंने कड़ी निंदा की। भगवंत मान ने कहा कि, राज्यसभा सांसद को अपने साथ करके भाजपा ने राज्य के साथ गद्दारी की है। उन्होंने कहा कि, ‘बीजेपी का यहां अपना कुछ नहीं है। बीजेपी तिकड़मबाजी कर रही है लेकिन वो पंजाब नहीं जीत सकती है। ये सभी अपनी जान बचाने के लिए बीजेपी में गए हैं।
BJP नेता ने केजरीवाल को क्या सलाह दी?
BJP नेता गौरव वल्लभ ने राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के AAP छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर कहा कि, ‘मैं अरविंद केजरीवाल से ये कहना चाहूंगा कि आप भगवंत मान को पकड़कर रखिएगा कि कब वे सारे विधायक लेकर फुर्र हो जाएं… पंजाब में AAP आने वाले चुनाव में बुरी तरह से हार रही है क्योंकि अरविंद केजरीवाल आप स्वयं इस युग के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी हैं, जो व्यक्ति अपने बच्चों की सौगंध झूठी खा सकता है, उस पर कोई भी विश्वास नहीं कर सकता है।’
पहले AAP के पास राज्यसभा में 10 सांसद थे, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पहचान देते थे। लेकिन अब 7 सांसदों के जाने के बाद सिर्फ 3 सदस्य बचे हैं। इससे पार्टी की संसद के ऊपरी सदन में मौजूदगी बेहद कमजोर हो जाएगी। इससे पार्टी की कानूनों पर असर डालने की क्षमता भी घट जाएगी।
‘एंटी-डिफेक्शन कानून’ यहां नहीं होगा लागू
इस पूरे मामले में अहम बात यह भी है कि, दो-तिहाई सांसदों ने एक साथ पार्टी बदली है। ऐसे में कानून के मुताबिक इसे डिफेक्शन नहीं, बल्कि मर्जर माना जाता है। इसलिए इन 7 सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है।
यह सिर्फ संख्या का मामला ही नहीं, इससे पार्टी की छवि पर भी गहरा असर पड़ेगा। शुरुआती चेहरे और रणनीतिक नेता के जाने से अंदरूनी असंतोष साफ दिख रहा है। विपक्षी दल अब AAP पर मूल एजेंडे से भटकने का आरोप लगा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल के लिए यह व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका है।
पंजाब चुनाव से पहले खतरे की घंटी
पंजाब AAP का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। चुनावी रणनीति के मास्टरमाइंड माने जाने वाले नेताओं के जाने से पार्टी की तैयारी कमजोर पड़ सकती है। अगर यहां असर पड़ा तो AAP की राष्ट्रीय पहचान भी दांव पर लग सकती है। राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को AAP के लिए चेतावनी का संकेत बता रहे हैं। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद अब देखना यह होगा कि पंजाब की राजनीति और आगामी चुनावों पर इसका क्या असर पड़ता है।










