गेहूं की कटाई के बाद खाली न छोड़ें खेत, तुरंत करें मूंग की बुवाई..जानिए तरीका

किसान गेहूं या चने की कटाई करने के बाद अक्सर खेतों को खाली छोड़ देते हैं. इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि गेहूं की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय उनमें मूंग की बुवाई करें. अगर समय पर मूंग की बुवाई कर दी जाए तो कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. मूंग की फसल सिर्फ 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके साथ ही यह फसल जमीन की उर्वरक क्षमता भी बढ़ाती है.

गेहूं की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की कटाई के तुरंत बाद खेत की हल्की जुताई कर पाटा लगाकर मूंग की बुवाई कर देनी चाहिए. मूंग की बुवाई के लिए मार्च से मई के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. मूंग की बुवाई के लिए प्रति बीघा 8 से 10 किलो बीज पर्याप्त होता है. किसान इसकी बुवाई छिटाई विधि से भी कर सकते हैं या रस्सी की मदद से लाइनों में भी बुवाई कर सकते हैं. लाइनों में बुवाई करने से लागत कम आती है और फसल की देखभाल भी आसान होती है.

क्या है मूंग बुवाई का तरीका

लाइनों में बुवाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना लाभकारी होता है. इस फसल में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती. एक या दो बार सिंचाई से ही पूरी फसल तैयार हो जाती है और इसमें खाद व दवाओं का खर्च भी बहुत कम होता है. इसलिए यह किसानों के लिए लाभकारी फसल मानी जाती है. जब इस फसल में फलियां निकलने लगती हैं तो किसान इसकी दो से तीन बार तुड़ाई कर सकते हैं.

हल्की नमी रह जाए तब करें मूंग की बुवाई

कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद मौर्य ने बताया कि जो किसान चना, सरसों, मटर या मसूर की कटाई कर चुके हैं, उनके लिए खेत खाली छोड़ने से बेहतर है कि समय पर मूंग की बुवाई कर दें. मूंग की बुवाई करने से पहले कटाई के तुरंत बाद खेत में पानी लगाकर पलेवा कर देना चाहिए. जब खेत में हल्की नमी रह जाए तो जुताई करके मूंग की बुवाई कर देनी चाहिए.

मूंग की बुवाई की विधि

मूंग की बुवाई, किसान दो विधियों से कर सकते हैं. पहली, रस्सी की मदद से लाइनों में बुवाई और दूसरी, छिटाई विधि से बुवाई. एक बीघा खेत में बुवाई के लिए लगभग 4 से 5 किलो बीज पर्याप्त होता है. किसान कृष्ण बीज गोदाम से संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं.

किसान अगेती गेहूं की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई कर सकते हैं. अगर बुवाई में देरी हो जाती है तो आगे चलकर बरसात के मौसम में दिक्कतें बढ़ जाती हैं और फसल में रोग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. बरसात के समय फलियों पर भी इसका असर पड़ सकता है. इसलिए किसान भाई सरसों, चना और मटर की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई कर दें.

मूंग की फसल 65 से 70 दिनों में तैयार

कृषि अधिकारी ने बताया कि मूंग की फसल 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. एक बीघा खेत में इसकी बुवाई करने में करीब 7 से 8 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि मुनाफा लगभग 70 से 80 हजार रुपये तक हो सकता है. इस तरह कम समय में किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है. इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि खेत खाली छोड़ने के बजाय मूंग या उड़द की बुवाई जरूर करें.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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