UP के बाद राजस्थान में भी ‘खबरों वाली क्लास’, बदलेगी सरकारी स्कूलों की सूरत, खत्म होगा प्रतियोगी परीक्षाओं का डर

Last Updated:January 02, 2026, 08:22 IST

Newspaper Reading: देश के 2 हिंदी भाषी राज्यों ने स्कूल असेंबली में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. अब उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में सुबह प्रार्थना के साथ ही हेडलाइंस की भी गूंज सुनाई देगी.

Newspaper Reading: स्कूल असेंबली में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया हैनई दिल्ली (Newspaper Reading). उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों ने अपने सरकारी स्कूलों के छात्रों को आधुनिक और जागरूक बनाने के लिए बहुत प्रभावी कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में समाचार पत्र उपलब्ध कराने की सफल शुरुआत के बाद अब राजस्थान सरकार ने भी इसी राह पर चलने का फैसला लिया है. इन दोनों राज्यों का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को दुनियाभर की सूचनाओं से जोड़ना है.

‘न्यूजपेपर इन एजुकेशन’ (NIE) से स्टूडेंट्स केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे. शिक्षा के क्षेत्र में आए इस बड़े बदलाव का असर लाखों छात्रों पर पड़ेगा. इससे स्टूडेंट्स का भाषाई कौशल बढ़ेगा और सामान्य ज्ञान को नई ऊंचाई मिलेगी. डिजिटल मीडिया के शोर के बीच बच्चों को प्रिंट मीडिया यानी अखबार से जोड़ना शानदार प्रयास है. इससे उनकी एकाग्रता बढ़ेगी और पढ़ने की क्षमता बेहतर होगी. ‘स्मार्ट एजुकेशन’ से स्टूडेंट्स को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी.

यूपी और राजस्थान में शिक्षा की नई लहर

यूपी और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है. पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों में अखबार पहुंचाना शुरू किया. इससे बच्चे किताबों के साथ-साथ दुनियादारी भी सीख सकेंगे. अब राजस्थान सरकार ने भी ठीक वैसे ही अपने स्कूलों में अखबार देना जरूरी कर दिया है. इस कोशिश से हिंदी बोलने वाले राज्यों के सरकारी स्कूलों के बच्चे भी हर मामले में प्राइवेट स्कूलों की तरह स्मार्ट और जागरूक बन सकेंगे. उन्हें आगे जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलेगी.

स्कूल से शुरू होगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स रिसोर्सेस के अभाव में समसामयिक विषयों (Current Affairs) में पिछड़ जाते हैं. यूपी और राजस्थान सरकारों का मानना है कि अगर स्टूडेंट्स बचपन से ही अखबार पढ़ने की आदत डालेंगे तो उन्हें भविष्य में यूपीएससी, एसएससी, क्लैट, पुलिस सेवा, राज्य स्तरीय प्रशासनिक सेवाओं (UPPSC/RAS) जैसी परीक्षाओं के लिए अलग से बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. इससे बच्चों में रीडिंग हैबिट भी विकसित की जा सकेगी.

भाषा और संवाद कौशल में सुधार

अखबार केवल नई सूचनाओं का सोर्स नहीं, बल्कि भाषा सीखने का सशक्त माध्यम भी माने जाते हैं. हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्रों के जरिए स्कूल स्टूडेंट्स नए शब्दों, मुहावरों और लेखन की शैलियों से परिचित होते हैं. उत्तर प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में अखबार के संपादकीय पर चर्चा शुरू की गई है. अब राजस्थान के स्कूलों में भी प्रार्थना सभा यानी मॉर्निंग असेंबली के दौरान प्रमुख हेडलाइंस पढ़ने से बच्चों की पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स बेहतर होंगी.

कम होगा डिजिटल गैप

डिजिटल क्रांति के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इंटरनेट और सूचना की पहुंच सीमित है. स्कूलों में अखबारों की उपलब्धता से सभी बच्चों को समान अवसर मिलेंगे. दोनों राज्यों में इसके लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं. उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत और स्कूल प्रबंधन समितियों के सहयोग से अखबार पहुंचाए जा रहे हैं. वहीं राजस्थान में शिक्षा विभाग ने उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पुस्तकालयों के लिए बजट और दिशानिर्देश तय किए हैं. छात्रों को महत्वपूर्ण खबरों की कटिंग करने और उनका रिकॉर्ड बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें

First Published :

January 02, 2026, 08:22 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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