Profitable Farming: मछली पालन नहीं, रिटायर्ड फौजी ने तालाब से शुरू किया ये खास बिजनेस, किसान भी सीख रहे नया मॉडल

Last Updated:November 09, 2025, 15:01 IST

Pearl Farming Benefits: कन्नौज के रिटायर्ड फौजी हरेंद्र सिंह राजपूत ने देश की सेवा के बाद मोती उत्पादन का नया प्रयोग शुरू किया है. उन्होंने अपने गांव प्रेमपुर में तालाबों में सीपों के जरिए मोती उगाकर खुद के लिए रोजगार का रास्ता खोला और आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है.

कन्नौज: देश की सेवा करने के बाद अब एक रिटायर्ड फौजी ने अपने गांव में नया आर्थिक मिशन शुरू किया है. प्रेमपुर गांव निवासी हरेंद्र सिंह राजपूत ने तालाबों में सीपों के जरिए मोती उगाकर न सिर्फ खुद के लिए रोजगार का अवसर बनाया है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं.

हरेंद्र सिंह ने ओडिशा से मोती उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया और इसके बाद अपने गांव में दो तालाबों में यह प्रयोग शुरू किया. उन्होंने तालाबों में सीपों में मस्सल और बीज डालकर मोती उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की. करीब छह माह में सीपों में मोती बनने लगते हैं और 18 से 24 महीने में यह पूरी तरह तैयार हो जाते हैं.

कैसे शुरू किया और कितना लाभ होगा
हरेंद्र सिंह बताते हैं कि शुरू में यह काम उन्होंने छोटे स्तर पर किया था, लेकिन अब उनकी तकनीक से तैयार मोतियों की मांग लगातार बढ़ रही है. बाजार में एक मोती की कीमत आकार और गुणवत्ता के अनुसार 100 से 250 रुपये तक मिल रही है. फिलहाल उनके तालाबों में करीब 20 हजार सीप डाले गए हैं, जिनसे अगले वर्ष लगभग 40 हजार मोती तैयार होने की उम्मीद है.

कम लागत में तगड़ा उत्पादन
हरेंद्र सिंह का कहना है कि मोती उत्पादन कम लागत और कम जगह में होने वाला व्यवसाय है, जिसे कोई भी किसान आसानी से अपना सकता है. इसके लिए केवल साफ पानी वाला छोटा तालाब, सीप और कुछ जरूरी जैविक सामग्री की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया कि एक बार सीप डालने के बाद 18 से 24 महीनों तक उसकी देखभाल करनी होती है, जिसके बाद मोती तैयार होकर निकलते हैं. हरेंद्र सिंह अब अपने गांव के युवाओं और किसानों को भी मोती उत्पादन का प्रशिक्षण देने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि इससे गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और पारंपरिक खेती से अलग नई आय का स्रोत मिलेगा.
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मछलीपालन विभाग के अधिकारियों ने उनके प्रयास की सराहना की है और कहा कि अगर जिले के अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो कन्नौज मोती उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है. हरेंद्र सिंह के इस प्रयास से न सिर्फ उनका खुद का व्यवसाय बढ़ रहा है, बल्कि गांव और आसपास के किसानों के लिए भी नई आर्थिक संभावनाएं खुल रही हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें

Location :

Kannauj,Uttar Pradesh

First Published :

November 09, 2025, 15:01 IST

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मछली पालन नहीं, रिटायर्ड फौजी ने तालाब से शुरू किया ये खास बिजनेस

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dainikupeditor@gmail.com

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