Last Updated:January 03, 2026, 10:32 IST
Magh Mela 2026: कड़ाके की ठंड के बीच आस्था की तपिश ने संगम तट को जीवंत कर दिया है. पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर माघ मेला 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया है. ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. 44 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व तैयारियां की हैं.
कड़ाके की ठंड के बीच माघ मेला 2026 का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ हो गया है. कड़ाके की ठंड के बावजूद संगम तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. ब्रह्म मुहूर्त से अब तक लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. मेला प्रशासन का अनुमान है कि आज 25 से 30 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान करेंगे. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 4 बजे से हो चुकी है.
इस वर्ष माघ मेले में 75 वर्षों बाद एक दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है. आज से श्रद्धालु कल्पवास का संकल्प लेकर संगम की रेती पर कल्पवास की शुरुआत कर रहे हैं. माघ मेले में हर वर्ष 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक कठिन तपस्या और साधना करते हैं. कल्पवास पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक चलता है, जिसमें कल्पवासी जीवन और मृत्यु के बंधनों से मुक्ति की कामना के साथ जप, तप और साधना करते हैं.
पौष पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि यह पितरों की पूर्णिमा है और इसे कल्याण पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करते हैं. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और सब्जियों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति और घर में सुख-समृद्धि बढ़ने की मान्यता है.
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44 दिनों तक चलने वाले माघ मेले में कुल 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. मेले का दायरा 800 हेक्टेयर में बढ़ाया गया है और इसे सात सेक्टरों में बसाया गया है. श्रद्धालुओं के लिए आठ किलोमीटर लंबा स्नान घाट तैयार किया गया है. सिंचाई विभाग द्वारा संगम में 10 हजार क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. लोक निर्माण विभाग ने 160 किलोमीटर चेकर्ड प्लेट बिछाई है. यूपी जल निगम ने 242 किलोमीटर पेयजल और 85 किलोमीटर सीवर लाइन डाली है. यूपी पावर कॉरपोरेशन ने 25 अस्थायी विद्युत सब स्टेशन स्थापित किए हैं.
श्रद्धालुओं के त्वरित इलाज के लिए 20-20 बेड के दो अस्पताल, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं. इसके अलावा एक वेक्टर कंट्रोल यूनिट, पांच आयुर्वेदिक और पांच होम्योपैथिक अस्पताल भी स्थापित किए गए हैं. 50 एंबुलेंस मेले में तैनात हैं. स्वच्छता के लिए 25 हजार शौचालय, आठ हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग और 30 सक्शन मशीनें लगाई गई हैं. तीन हजार सफाईकर्मी लगातार सफाई कार्य में जुटे हैं. परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसें लगाई गई हैं और 42 स्थानों पर पार्किंग की सुविधा दी गई है.
मेला क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं. 17 थाने, 42 पुलिस चौकियां, 20 फायर टेंडर, सात अग्निशमन चौकियां, 20 वॉच टावर, एक जल पुलिस थाना और कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. आठ किलोमीटर डीप वाटर बैरिकेडिंग की गई है. क्राउड मैनेजमेंट के लिए सीसीटीवी और एआई युक्त 400 कैमरों से भीड़ नियंत्रण, घनत्व विश्लेषण और घटना रिपोर्टिंग की जा रही है. ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. यूपी एटीएस के कमांडो भी मेले में तैनात हैं. शहर से लेकर मेला क्षेत्र तक चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है।
छह प्रमुख स्नान पर्व: माघ मेले के दौरान कुल छह प्रमुख स्नान पर्व पड़ेंगे. 3 जनवरी, 14-15 जनवरी मकर संक्रांति, 18 जनवरी मौनी अमावस्या, 23 जनवरी, 30 जनवरी बसंत पंचमी, 1 फरवरी माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी महाशिवरात्रि (समापन).
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January 03, 2026, 09:01 IST
कड़ाके की ठंड, अटूट आस्था… पौष पूर्णिमा पर स्नान पर्व की खास तस्वीरें











