Ghazipur News : ऊपर फैली हैं झाड़ियां, नीचे अंग्रेजों का कब्रिस्तान! जहां दफन है इतिहास के कई राज

गाज़ीपुर : गाज़ीपुर के आदर्श बाज़ार इलाके में मौजूद ब्रिटिश कालीन कब्रिस्तान इतिहास की एक भूली-बिसरी निशानी है, जिसे स्थानीय लोग आज भी ‘हथिया खाना’ के नाम से जानते हैं. करीब दो बीघा में फैले इस स्थल पर 19वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों की कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं. कहा जाता है कि अंग्रेज़ी हुकूमत के समय यहां हाथियों को रखा जाता था और उनका व्यापार होता था, इसी वजह से इसे ‘हथिया खाना’ कहा जाने लगा. कब्रों पर 1839 से 1860 के बीच की तिथियां अंकित हैं, जो बताती हैं कि यह स्थान ब्रिटिश शासन के शुरुआती दौर का है. पत्थरों पर बनी सुंदर नक्काशी और अंग्रेज़ी लिपि में लिखे नाम आज भी उस दौर की गवाही देते हैं, जब गाज़ीपुर प्रशासनिक और सैन्य दृष्टि से एक अहम केंद्र हुआ करता था.

लोकल 18 की टीम जब ‘हथिया खाना’ पहुंची तो वहां का नज़ारा चौंकाने वाला था. कई कब्रें छह से सात फीट ऊंची हैं, जिन पर ब्रिटिश अधिकारियों के नाम, मृत्यु की तिथि और मृत्यु के कारण खुदे हुए हैं. कुछ समाधियों पर पत्थर की मूर्तियां और विशेष नक्काशी भी बनी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि वहां दफ्न व्यक्ति ब्रिटिश शासनकाल में किसी उच्च प्रशासनिक पद पर रहा होगा. हैरानी की बात यह रही कि एक कब्र का ताबूत ज़मीन के बाहर दिखाई दिया. हालांकि इसका कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि शायद कभी अतीत में उस ताबूत को कब्र के भीतर से निकाला गया हो.

कई कब्रें हो गई क्षतिग्रस्त?
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों से इस स्थान की देखरेख न होने के कारण कई कब्रें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, फिर भी यह स्थल आज भी इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज़ बनकर खड़ा है. यहां सिर्फ़ अधिकारी ही नहीं, बल्कि अनाथ और विधवाओं की भी कब्रें हैं जो ब्रिटिश समाज की मानवीय और सामाजिक संरचना को दर्शाती हैं.

50 साल पहले तक आते थे अंग्रेज
हालांकि, गाज़ीपुर के आदर्श बाज़ार स्थित ‘हथिया खाना कब्रिस्तान आज इतिहास की धूल में छिपता जा रहा है. इस जगह की देखरेख एक स्थानीय माली परिवार की चौथी पीढ़ी कर रही है. परिवार की सदस्य छठी देवी बताती हैं कि हम बचपन से इन कब्रों को देख रहे हैं. पहले बाबा-दादा के ज़माने में हर साल अंग्रेज़ लोग आते थे, फूल चढ़ाते थे और हमारे परिवार को पैसे भी देते थे. बताया जाता है कि करीब 50 साल पहले तक ब्रिटेन से लोग यहां आते रहे, जो इस स्थल के अंतरराष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है.

बन सकता है हेरिटेज टूरिज़्म स्थल
आज यह इलाका झाड़ियों और घास में छिप चुका है, जहां कभी ब्रिटिश अधिकारियों की समाधियां शान से खड़ी थीं. स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर प्रशासन ध्यान दे, तो ‘हथिया खाना’ गाज़ीपुर का एक महत्वपूर्ण हेरिटेज टूरिज़्म स्थल बन सकता है. इतिहासकारों का कहना है कि यह कब्रिस्तान ब्रिटिश शासन के आख़िरी दौर की गवाही देता है और इसके संरक्षण की तत्काल ज़रूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस भूले हुए इतिहास को जान सकें.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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